#बलरामपुर! शुक्रवार शाम #उतरौला के एम वाई उस्मानी इंटर कॉलेज के खेल मैदान में आयोजित " एक शाम मरहूम मुनव्वर राना के नाम" ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन में आए शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुशायरे का आगाज आयोजक सुमय्या राना ने किया। इस दौरान पूर्व विधायक अनवर महमूद खान, डुमरियागंज विधायक सैयदा खातून, डॉ एहसान खान, डॉ रफीउल्लाह खान, शारुन खान, सिराजुद्दीन खान पप्पू समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
मुशायरे में जौहर कानपुरी, हाशिम फिरोजाबादी, शबीना अदीब, महेंद्र मधुर, बिलाल सहारनपुरी, मुमताज नसीम,
खुर्शीद हैदर, तबरेज राना, प्रतिभा यादव,
अल्तमस अब्बास, अफजल इलाहाबादी, सबा बलरामपुरी, अरमान रज़ा बलरामपुरी समेत स्थानीय शायर इफ्हाम उतरौलवी, राज उतरौलवी, शुजा उतरौलवी, आमिर आमरी, युसुफ इकबाल ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। संचालन शायर नदीम फरुख ने किया। सायरा शबीना अदीब ने गजल "तुझे आरजू थी जिसकी वही प्यार ला रही हूं मेरे गम में रोने वाले तेरे पास आ रही हूं पर खूब वाहवाही बटोरी।
जौहर कानपुरी ने पढ़ा 'इरादे हों जवां जिनके वही बाज़ी पलटे हैं।
मुख़ालिफ के लिए हर आदमी आंधी नहीं होता।
हवेली छोड़ कर कच्चे मकां में रहना पड़ता है।
फकत चरखा चलाने से कोई गाँधी नहीं होता।
सबा बलरामपुरी ने अपनी गजल 'दिल की बस्ती में उजालों का सफ़र बाकी है,
टूट कर बिखरे हैं सपने तो क्या, हौसला बाकी है से शमा बाध दिया।
अफजल इलाहाबादी ने पढ़ा 'अब तो हर एक अदाकार से डर लगता है,
मुझ को दुश्मन से नहीं यार से डर लगता है।
अल्तमस अब्बास ने पढ़ा बड़े सलीक़े से ज़िंदगी को अज़ाब कर के चला गया था,
वो एक शख़्स जो मुझको ख़राब कर के चला गया था।
हाशिम फिरोजाबादी ने पढ़ा 'हमने हर दौर में सच बोल के देख लिया,
लोग नाराज़ हुए, बात बदलती ही नहीं।
दिल की वीरानियों का हाल न पूछो यारो,
इस नगर में कोई अपना भी नहीं मिलता है।
मोहब्बतों का सिला इस तरह मिला मुझको,
जिसे भी चाहा वही दूर होता गया मुझसे
मुशायरा आगाज से पूर्व मुशायरे की आयोजक सुमैय्या राना ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का स्वागत किया।
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