*गोवटा बांध में आस्था और प्रकृति का संगम*
*बाणमाता मंदिर: मानसून में झरने और आस्था का केंद्र*
आकोला( रमेश चंद्र डाड) मांडलगढ़ कस्बे से लगभग 8 किमी दूर स्थित गोवटा गांव अब श्रद्धा और पर्यटन दोनों का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां *बाणमाता शक्तिपीठ* और *गोवटा बांध* मानसून में हजारों लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
*चमत्कारी मान्यता - बाणमाता शक्तिपीठ*
स्थानीय मान्यता के अनुसार गोवटा माता मंदिर को *"बाणमाता शक्तिपीठ"* कहा जाता है। यहां लकवाग्रस्त मरीजों के ठीक होने की विशेष मान्यता है। दूर-दराज से सैकड़ों परिवार व्हीलचेयर या चारपाई पर मरीजों को लेकर मन्नत मांगने आते हैं। कहा जाता है कि माता के आशीर्वाद से कई मरीज अपने पैरों पर चलकर लौटते हैं।
इसी आस्था के चलते *शनिवार-रविवार और नवरात्रि* में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। नवरात्रि में मेले का आयोजन होता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार भक्त यहां *मुर्गा-मुर्गी* भी चढ़ाते हैं जो मंदिर परिसर में स्वतंत्र विचरण करती हैं।
हाल ही में मंदिर प्रांगण का आकर्षक शैली में नवनिर्माण हुआ है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित मंदिर से पूरे गोवटा बांध का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
*पर्यटन केंद्र - गोवटा बांध*
*मेंनाली नदी* पर बना गोवटा बांध सिंचाई के लिए बनाया गया है। बारिश में बांध लबालब भरने पर पानी दीवार से झरने की तरह गिरता है, जो प्राकृतिक झरने जैसा लगता है।
इसी कारण *कोटा, बूंदी, टोंक और भीलवाड़ा* जिलों से हजारों पर्यटक यहां जलक्रीड़ा का आनंद लेने आते हैं। चारों ओर हरियाली, पहाड़ियां और शांत वातावरण इसे परिवार के साथ पिकनिक के लिए आदर्श बनाता है।
*प्रशासन की अपील*
भारी बारिश में पानी का बहाव तेज हो जाता है। प्रशासन ने पर्यटकों से *सुरक्षा निर्देशों का पालन* करने और चट्टानों-झरनों के पास सेल्फी लेते समय सावधानी बरतने की अपील की है।