पीलीबंगा ACJM कोर्ट का बड़ा फैसला: चेक अनादरण मामले में जज अजयदीप सिंह ने सुनाई 1.5 वर्ष की कैद, 12 लाख रुपए हर्जाना भरने का आदेश; अधिवक्ता संदीप गोदारा व गौरीशंकर गाट ने की प्रभावी पैरवी
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पीलीबंगा (हनुमानगढ़):- लालबहादुर भाखर:- न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) पीलीबंगा के पीठासीन अधिकारी श्री अजयदीप सिंह ने चेक बाउंस (चेक अनादरण) से जुड़े एक अहम मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को 1 वर्ष 6 माह के साधारण कारावास तथा परिवादी को 12 लाख रुपए प्रतिकर (मुआवजा) राशि अदा करने का आदेश जारी किया है।
कोर्ट में वकीलों की मजबूत पैरवी
मामले में परिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरीशंकर गाट एवं अधिवक्ता संदीप गोदारा ने प्रभावी कानूनी पैरवी की। अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत अकाट्य साक्ष्यों, बैंक दस्तावेजों और विधिक तर्कों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त के तर्कों को खारिज करते हुए उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत दोषी पाया।
मामले की पृष्ठभूमि
अधिवक्ता संदीप गोदारा के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार रहा:
* उधार लेन-देन: वार्ड नंबर 17, पीलीबंगा निवासी परिवादी गुरप्रीत सिंह पुत्र गुरबचन सिंह सोनी से आरोपी नरेंद्र कुमार पुत्र वेद प्रकाश अरोड़ा (निवासी वेयरहाउस रोड, वार्ड नं. 06 पुराना, पीलीबंगा) ने 7,50,000 रुपए (सात लाख पचास हजार) उधार लिए थे।
* चेक हुआ बाउंस: उधार राशि चुकता करने के लिए आरोपी नरेंद्र कुमार ने 1 जून 2017 को अपने बैंक खाते का 7.50 लाख रुपए का चेक परिवादी को सौंपा। परिवादी द्वारा बैंक में चेक प्रस्तुत करने पर आरोपी के खाते में अपर्याप्त राशि (Insufficient Funds) होने के कारण चेक अनादरित (बाउंस) हो गया।
* अदालती परिवाद: विधिक नोटिस की अवधि बीत जाने के बाद भी राशि का भुगतान न होने पर परिवादी गुरप्रीत सिंह ने अपने अधिवक्ताओं के जरिए न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पीलीबंगा के समक्ष चेक अनादरण का परिवाद दायर किया।
अदालत का अंतिम आदेश
न्यायाधीश श्री अजयदीप सिंह ने दोनों पक्षों की अंतिम बहस व पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के उपरांत फैसला सुनाया:
* अभियुक्त नरेंद्र कुमार अरोड़ा को 1 वर्ष 6 माह (18 महीने) के साधारण कारावास की सजा।
* अभियुक्त को परिवादी के पक्ष में 12,00,000 रुपए (बारह लाख रुपए) प्रतिकर राशि के रूप में अदा करने का आदेश।
* आदेशित प्रतिकर राशि निर्धारित समयावधि में जमा न करवाने की स्थिति में अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।