*करोड़ो जन्मों के पुण्य से प्राप्त होती संतों की चरण रज-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*रामद्वारा धाम में एक पखवाड़ा वाणीजी का सामूहिक पाठ 27 सितम्बर से*
भीलवाड़ा:निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),20 सितम्बर संतों की चरण रज देवताओं को भी प्राप्त होना दुर्लभ होता है वह अगर मनुष्य को प्राप्त हो जाए तो करोड़ो जन्मों का पुण्य होता है। राम गुरू के चरण रज का बड़ा प्रताप है। उनके चरणों नीचे शीश रख वह रज माथे पर लगाने से हमारे जीवन का कल्याण हो जाता है। इससे हमारे रजो गुण सत गुण में बदल जाते है। जिसे गुरू की चरण रज मिल जाए उसका जीवन सार्थक ओर सफल हो जाता है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत रविवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।
विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत 25 सितम्बर को रामद्वारा धाम में भजन संध्या का आयोजन होगा। आचार्य रामदयालजी महाराज का अवतरण दिवस 26 सितम्बर को आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। रामद्वारा धाम में 27 सितम्बर को विराट संत सम्मेलन का आयोजन होगा। इसी दिन अभिजीत मुर्हुत में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज की अनुभव वाणी का 15 दिवसीय सामूहिक पाठ शुरू होगा। इसके बाद ये पाठ 28 सितम्बर से प्रतिदिन सुबह 7 बजे शुरू होगा। इसके माध्यम से श्रद्धालु वाणीजी के 1015 पृष्ठों का सामूहिक पाठ करेंगे। प्रतिदिन सात से आठ घंटे तक पाठ होगा। एक दिन में औसतन 80 पृष्ठों का पाठक पाठ करेंगे।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। प्रवचन से पूर्व सुबह 8 से 9 बजे तक पंच ग्रंथ का सामूहिक पाठ किया गया। आचार्यश्री ने कहा कि अज्ञान की ग्रंथियों को विच्छेद करने वाले पंच ग्रंथ का पाठ करने से चित की शुद्धि, वातावरण की शुद्धि एवं जीवन की शुद्धि होती है। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सुबह 8 से 10 बजे तक चातुर्मासिक प्रवचन होंगे। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।