भिण्ड में भूकंपरोधी निर्माण पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
आपदा के समय जन-धन की हानि को न्यूनतम करने तथा भवनों एवं अन्य संरचनाओं को भूकंपरोधी बनाने के उद्देश्य से भिण्ड जिले के आईटीआई कॉलेज में “भूकंपरोधी निर्माण” पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का आयोजन डिजास्टर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भोपाल, गृह विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला प्रशासन भिण्ड के सहयोग से किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर भिण्ड कलेक्टर श्री करोड़ी लाल मीना ने अपने उद्बोधन में कहा कि आपदा का कोई अवकाश नहीं होता है, आपदा कभी भी कहीं भी किसी भी रुप में हमारे सामने आ सकती है इसलिए जरुरी है कि आपदाओं के पहले हम पूर्व तैयारी कर लें। प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने हेतु प्रतिभागियों को निर्देशित किया।
अपर कलेक्टर श्री लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से अभियंताओं को लाभ होगा साथ ही साथ जिले में बनने वाली संरचनायें भी भूकंप के प्रति और अधिक मजबूत होंगी।
कार्यपालन यंत्री (भवन) श्री विपिन सोनकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह प्रशिक्षण अभियंताओं के लिए बेहद महत्पूर्ण है। प्रशिक्षण में बिल्डिंग कोड्स के अपडेट के साथ नयी तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न शासकीय विभागों तथा निजी क्षेत्र से जुड़े लगभग 60 अभियंता भाग ले रहे हैं। इनमें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), पीआईयू, एमपीबीडीसी, एसईसी, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग तथा निजी संस्थानों में कार्यरत अभियंता शामिल हैं।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस श्री अभिषेक मिश्रा, आपदा प्रबंध संस्थान गृह विभाग ने अपनी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन के कानूनी एवं व्यावहारिक पक्षों की जानकारी दी। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में वर्ष 2025 में किए गए महत्वपूर्ण संशोधनों तथा उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। 2025 के संशोधनों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा संबंधी डेटाबेस, संस्थागत भूमिकाओं तथा आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने भूकंप के दौरान होने वाले गैर-संरचनात्मक प्रभावों (Non-Structural Impact) पर भी प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। प्रशिक्षण में बताया गया कि भूकंप के दौरान केवल भवन की संरचनात्मक क्षति ही खतरा नहीं होती, बल्कि फर्नीचर, विद्युत उपकरण, पाइपलाइन, छत से गिरने वाली वस्तुएं, कांच तथा अन्य गैर-संरचनात्मक घटक भी गंभीर चोट एवं जनहानि का कारण बन सकते हैं।
प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि भूकंप के दौरान व्यक्ति को किस प्रकार प्रतिक्रिया करनी चाहिए, घबराहट से कैसे बचना चाहिए तथा स्वयं और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए कौन-से तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
होमगार्ड टीम ने किया खोज एवं बचाव का प्रदर्शन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस होमगार्ड, भिंड की टीम द्वारा ढही हुई संरचना में फंसे व्यक्तियों की खोज एवं बचाव का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी संरचना के ढ़हने के बाद बचाव कार्य किस प्रकार व्यवस्थित तरीके से किया जाना चाहिए और किस प्रकार सावधानी बरतते हुए मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य यह समझाना था कि आपदा के बाद त्वरित लेकिन सुरक्षित खोज एवं बचाव कार्रवाई किस प्रकार की जाए, ताकि बचावकर्मियों और प्रभावित व्यक्तियों दोनों के लिए जोखिम कम किया जा सके तथा जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में अभियंताओं को भूकंपरोधी निर्माण की अवधारणाओं, संरचनाओं की भूकंपीय सुरक्षा, निर्माण के दौरान आवश्यक सावधानियों तथा आपदा के समय प्रभावी प्रतिक्रिया से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य अभियंताओं की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ भूकंपरोधी एवं आपदा-लचीली संरचनाओं के निर्माण की दिशा में जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण करना है।
कल प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बिल्डिंग कोड 1893 के बारे में एवं फील्ड विजिट कराई जायेगी।
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21 views | Bhind, Madhya Pradesh | Aug 19, 2026