कितनी विडंबना है…
दोनों वीर सपूत एक ही ऑपरेशन सिंदूर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए।
एक शहीद की प्रथम पुण्यतिथि आने से पहले उसकी प्रतिमा बन गई, भव्य अनावरण हुआ, सम्मान के बड़े-बड़े कार्यक्रम हुए।
लेकिन हमारे बक्सर, चौसा की धरती का लाल, वीर शहीद Sunil Singh… आज भी सिर्फ नेताओं के वादों और जुमलों का इंतजार कर रहा है।
सवाल यह नहीं कि सम्मान किसे मिला और किसे नहीं…
सवाल यह है कि क्या शहादत की कीमत भी अब जगह, पहचान और राजनीति देखकर तय होगी?
जिस बेटे ने तिरंगे में लिपटकर देश के लिए अपनी जान दे दी, उसके परिवार को आज तक वह सम्मान नहीं मिला जिसका वादा किया गया था।
आखिर ये नेता शहीद के परिवार की आंखों में आंख डालकर कैसे बात कर लेते हैं?
कैसे भूल जाते हैं कि किसी मां ने अपना बेटा खोया है, किसी पत्नी ने अपना जीवनसाथी, किसी बच्चे ने अपना पिता।
शहीदों का सम्मान भाषणों से नहीं, वादे निभाने से होता है।
चौसा अपने वीर सपूत का सम्मान मांग रहा है… राजनीति नहीं, न्याय चाहिए। 🇮🇳
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Buxar, Buxar | Jun 13, 2026