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रिपोर्टर बक्सर

@satya23455944
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कितनी विडंबना है…
दोनों वीर सपूत एक ही ऑपरेशन सिंदूर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए।
एक शहीद की प्रथम पुण्यतिथि आने से पहले उसकी प्रतिमा बन गई, भव्य अनावरण हुआ, सम्मान के बड़े-बड़े कार्यक्रम हुए।
लेकिन हमारे बक्सर, चौसा की धरती का लाल, वीर शहीद Sunil Singh… आज भी सिर्फ नेताओं के वादों और जुमलों का इंतजार कर रहा है।
सवाल यह नहीं कि सम्मान किसे मिला और किसे नहीं…
सवाल यह है कि क्या शहादत की कीमत भी अब जगह, पहचान और राजनीति देखकर तय होगी?
जिस बेटे ने तिरंगे में लिपटकर देश के लिए अपनी जान दे दी, उसके परिवार को आज तक वह सम्मान नहीं मिला जिसका वादा किया गया था।
आखिर ये नेता शहीद के परिवार की आंखों में आंख डालकर कैसे बात कर लेते हैं?
कैसे भूल जाते हैं कि किसी मां ने अपना बेटा खोया है, किसी पत्नी ने अपना जीवनसाथी, किसी बच्चे ने अपना पिता।
शहीदों का सम्मान भाषणों से नहीं, वादे निभाने से होता है।
चौसा अपने वीर सपूत का सम्मान मांग रहा है… राजनीति नहीं, न्याय चाहिए। 🇮🇳
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देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी को लेकर विद्वानों की राय क्या है, आइए सुनते है
पूरा वीडियो देख सच्चाई आप बताए,
डुमरांव मेन रोड पर धान की रोपनी
इसके लिए भी पत्राचार लगातार किया जा रहा है, रोड तो नहीं बना लेकिन पत्राचार का क्रेडिट मिलना चाहिए, रोड कभी ना कभी बनेगा ही तो उसका अलग से क्रेडिट लिया जाएगा
सीजन चालू
बक्सर में गुरुवार को सुबह तेज हवा के साथ बारिश,
मोदी जी और नेहरू जी को भारत किस हालत में मिला था

जब जवाहरलाल नेहरू को देश मिला (1947)
Jawaharlal Nehru को स्वतंत्रता के समय एक बेहद कठिन परिस्थिति में देश मिला था।
भारत का विभाजन हुआ था, जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा और शरणार्थी संकट पैदा हुआ।
साक्षरता दर बहुत कम थी।
औद्योगिक आधार कमजोर था।
औसत आयु लगभग 32 वर्ष के आसपास थी।
कृषि पर निर्भर अर्थव्यवस्था थी और खाद्यान्न की कमी रहती थी।
500 से अधिक रियासतों का एकीकरण होना बाकी था।
नेहरू सरकार के प्रमुख कार्य
बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग स्थापित किए।
Indian Institutes of Technology जैसे तकनीकी संस्थानों की शुरुआत।
बड़े बांध और सिंचाई परियोजनाएं बनाई गईं।
वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी।
लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया।

जब नरेंद्र मोदी को देश मिला (2014)
Narendra Modi को एक स्थापित लोकतंत्र और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत मिला।
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में था।
आईटी और सेवा क्षेत्र विकसित हो चुके थे।
मजबूत बैंकिंग और औद्योगिक ढांचा मौजूद था।
मोबाइल और इंटरनेट का तेजी से विस्तार हो रहा था।
महर्षि विश्वामित्र महाविद्याल me परीक्षा
ट्रेन के लूप लाइन में लड़ाई
पेड़ के नीचे शिशु का इलाज

स्वास्थ्य मंत्री जी देखिए, डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में बिजली नहीं रहने पर mncu वाले नवजात का इलाज पेड़ के नीचे हो रहा है।
सफर
पिता जी के साथ सफर
बक्सर में 26 करोड़ का पुल बच्चों के क्रिकेट खेलने का काम कर रहा है
आज से ठीक एक साल पहले, चौसा की मिट्टी ने अपना एक वीर सपूत खो दिया था। सुनील सिंह देश की रक्षा करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हो गए थे। उस दिन पूरे इलाके की आंखें नम थीं, हर जुबान पर उनके साहस और बलिदान की चर्चा थी। नेताओं के काफिले पहुंचे, बड़े-बड़े वादे हुए, शहीद के परिवार को हर संभव सहायता और सम्मान देने की बातें कही गईं।
लेकिन एक साल बीत गया।
समय के साथ कैमरे चले गए, भाषण खत्म हो गए, मंच सिमट गए और वादों की आवाज भी धीमी पड़ गई। आज भी शहीद का परिवार उसी दर्द के साथ जी रहा है, जिसके साथ उसने अपने बेटे, भाई और पति को देश के लिए खोया था। शहादत का सम्मान केवल श्रद्धांजलि देने से नहीं होता, बल्कि उन वादों को निभाने से होता है जो उस परिवार से किए गए थे।
जब हम चैन की नींद सोते हैं, तब किसी मां की आंखें अपने शहीद बेटे की तस्वीर देखकर भर आती हैं। किसी बच्चे को आज भी अपने पिता की कमी महसूस होती है। किसी पत्नी के लिए समय वहीं ठहर गया है, जिस दिन तिरंगे में लिपटा उसका अपना घर लौटा था।
सुनील सिंह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उस बलिदान का प्रतीक हैं जिसके कारण हम सुरक्षित हैं। उनकी शहादत को याद रखना और उनके परिवार के साथ किए गए वादों को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
शहीद कभी मरते नहीं, लेकिन उन्हें भूल जाना समाज की सबसे बड़ी हार होती है। 🇮🇳🙏
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