फिर अलापा जाने लगा नए जिले का राग, कोटद्वार ही क्यों, रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री और पुरोला क्यों नहीं?
उत्तराखंड में नए जिलों की मांग कोई नई नहीं है। रानीखेत, डीडीहाट, कोटद्वार और यमुनोत्री जैसे क्षेत्रों में दशकों से अलग जिला बनाने की मांग उठती रही है। वर्ष 2011 में तत्कालीन सरकार ने चार नए जिले बनाने की घोषणा भी की, लेकिन आज तक ये जिले अस्तित्व में नहीं आ सके।
अब 2026 में एक बार फिर नए जिलों की मांग तेज हो रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता को आश्वासन मिलते रहेंगे? क्या नए जिले बनने से प्रशासनिक सुविधाएं बढ़ेंगी और पहाड़ के विकास को नई गति मिलेगी?
फिर अलापा जाने लगा नए जिले का राग, कोटद्वार ही क्यों, रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री और पुरोला क्यों नहीं?
आपकी राय क्या है?
उत्तराखंड में नए जिले बनने चाहिए या मौजूदा जिलों की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए?
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