#सेवा_संकल्प_अभियान में हितग्राहियों, विकास और प्रेरणादायक कहानियां लोगों जानेंगे
अंधेरा मिटता नहीं है, मिटाना पड़ता है, बुझे चिराग को फिर से जलाना पड़ता है
उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने सटई संकुल में जगाई साक्षरता की अलख
रामस्वरूप जाटव के प्रयासों से सामाजिक चेतना केंद्र और 6 आदर्श केंद्र हुए सक्रिय
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सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘कहानी बदलाव की’ पहल के माध्यम से जिले में विकास, प्रेरणा और सफलता की ऐसी कहानियां जन-जन तक पहुंचाई जा रही हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन रही हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी जनपद शिक्षा केंद्र बिजावर के संकुल सटई की है, जहां उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
संकुल सटई के खरयानी, पलकौंहा, ढोंडन, मैनारी और सुकवाहा जैसे सुदूर एवं कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में ग्रामीणों को साक्षरता से जोड़ना चुनौतीपूर्ण था। संकुल सह-समन्वयक रामस्वरूप जाटव ने जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र कुमार निगम एवं जिला सह-समन्वयक शफीक अहमद के मार्गदर्शन में इस चुनौती को अवसर में बदला। उन्होंने ग्राम प्रभारियों के साथ बैठकें कीं, छात्रों एवं ग्रामीणों के सहयोग से जागरूकता रैलियां निकालीं और दीवार लेखन के माध्यम से साक्षरता का संदेश घर-घर पहुंचाया। उनके प्रयासों से ग्रामीणों में पढ़ने-लिखने के प्रति रुचि बढ़ी और साक्षरता केंद्रों से जुड़ाव मजबूत हुआ।
नवाचार से आसान हुई सीखने की राह
असाक्षर वयस्कों को सरल और रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए रामस्वरूप जाटव ने अपने निजी व्यय से विशेष टीचिंग-लर्निंग मटेरियल (TLM) तैयार किए। चित्रमय पाठ्य सामग्री और शिक्षण चार्ट के माध्यम से जोड़-घटाव, अंक पहचान और शब्द ज्ञान जैसी बुनियादी बातें आसानी से समझाई जाने लगीं।
उनके इस नवाचार को जिला शिक्षा केंद्र छतरपुर द्वारा 26 जनवरी 2025 को आयोजित गणतंत्र दिवस प्रदर्शनी में भी स्थान दिया गया। प्रदर्शनी में जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी द्वारा उनके प्रयासों की विशेष सराहना की गई।
35 चेतना केंद्रों में जल रही साक्षरता की लौ
लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है कि आज संकुल सटई में 35 सामाजिक चेतना केंद्र और 6 आदर्श सामाजिक चेतना केंद्र सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर स्थानीय ‘अक्षर साथी’ ग्रामीणों को साक्षर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बरयापुरा में वर्षा जाटव, पुनगुवां में कविता यादव, सटई वार्ड क्रमांक-08 में राज जाटव, नदगांय खुर्द में प्रियंका अनुरागी, कसार में तुलसीदास प्रजापति और मैनारी में बबलू गौंड सहित अन्य अक्षर साथी निरंतर सेवा दे रहे हैं।
एक प्रयास, जो बदलाव की मिसाल बना
रामस्वरूप जाटव बताते हैं कि उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने उन्हें समाज के उन लोगों तक पहुंचने का अवसर दिया, जो शिक्षा की मुख्यधारा से दूर रह गए थे। उनका मानना है कि अशिक्षा के अंधकार को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास, जनसहयोग और संवेदनशील पहल जरूरी है।
सटई संकुल की यह कहानी बताती है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों से अधिक जरूरी है एक मजबूत संकल्प। एक व्यक्ति की पहल जब जनसहयोग से जुड़ती है, तो साक्षरता की एक छोटी-सी लौ भी अनेक घरों को रोशन कर सकती है।
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73 views | Chhatarpur, Madhya Pradesh | Sep 25, 2026