*अकड़ने से कुछ नहीं मिलता झुककर पूरी दुनिया का प्यार पा सकते- आचार्य पुलकसागर*
*पर्युषण में दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना,श्रद्धाभाव से भगवान का अभिषेक*
*आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पर्युषण की भक्ति के लिए उमड़े रहे श्रावक*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार )17 सितम्बर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना के तहत दूसरे दिन गुरूवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव से उत्तम मार्दव धर्म का पूजन एवं आराधना की गई। पर्युषण में आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ो श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा अर्चना व भक्ति में समर्पित है। पूर्यषण के दूसरे दिन आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में भगवान का अभिषेक करने चक्रवती के साथ इन्द्र रूप में श्रावक उमड़े। भगवान की भक्ति में श्रावक श्राविकाएं झूम उठे ओर जमकर नाचते गाते रहे।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म का संदेश देते हुए कहा कि जीवन को सफल बनाना है तो मान ओर क्रोध को दबाकर रखे। हमे असफलता पर क्रोध ओर सफलता पर मान आता है। चार कषाय क्रोध,मान, माया व लोभ से मुक्ति के बिना हम परमात्मा की प्राप्ति नहीं कर सकते। दशलक्षण पर्व कषायों पर जीत की प्रेरणा देता है। परमात्मा का नाम लेने पर ही जीवन का बेड़ा पार होगा। पशु ने भी उनका नाम लिया तो उसका बेड़ा पार हो गया। उन्होंने कहा कि जैसे हमारे भाव होंगे वैसा ही भव प्राप्त होगा। कभी भी अकड़ना नहीं चाहिए ओर विनम्र रहना चाहिए। जो विनम्र होकर परमात्मा को समर्पित रहता उसे ही उनकी कृपा प्राप्त होती है। झुकने वाला ही उपर उठता है। अकड़ने से कुछ नहीं मिलता झुककर पूरी दुनिया का प्यार पा सकते है। आचार्यश्री ने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म विनम्रता की सीख देता है। जो काम अकड़ से नहीं होते वह परमात्मा के चरण पकड़ लेने से हो जाएंगे। यदि परमात्मा की आराधना करते हुए भी छल कपट का भाव रखेंगे तो वह कभी सार्थक नहीं होगा। बाहर की बजाय हमारे भीतर बदलाव आना जरूरी है। हमारे अंदर जितनी पवित्रता होगी जीवन उतना ही मंगलमय बनता जाएगा। तन से ही नहीं मन से भी पवित्र होने का अवसर पर्युषण की आराधना है। संतों की संगति से जो सुख मिलता है वह बैकुण्ठ में भी प्राप्त नहीं हो सकता।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण के पहले दिन चक्रवती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य पारस खुश्बू जैन इन्दौर ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य शिरीष मंजू जैन इन्दौर ने प्राप्त किया। सांयकालीन महाआरती का सौभाग्य मंजूदेवी,दिलीप, प्रवीण एवं नवीन चौधरी परिवार ने प्राप्त किया। दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे है। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं हो रही है। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम को 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।