निरीक्षण या सिर्फ दिखावा? मुख्यमंत्री से सम्मानित गांव का ही निरीक्षण, बदहाल गांवों से क्यों दूरी?
ब्यूरो जालौन की रिपोर्ट
जालौन। लखनऊ से आए संयुक्त आयुक्त डीएन पांडेय ने शुक्रवार को डकोर ब्लॉक का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मनरेगा के अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कराने, जॉब कार्ड की संख्या बढ़ाने और अधिक से अधिक मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से यह भी कहा गया कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
लेकिन इस निरीक्षण को लेकर अब सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि निरीक्षण के लिए ऐरी रामपुरा गांव को चुना गया, जो मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित ग्राम पंचायत है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर उसी गांव का निरीक्षण क्यों कराया गया? डकोर ब्लॉक के दूसरे गांवों में जहां मनरेगा, गौशाला, सड़क, सफाई और विकास कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं, वहां निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?
क्या ब्लॉक अधिकारियों ने संयुक्त आयुक्त को सिर्फ बेहतर तस्वीर वाला गांव दिखाया?
क्या बदहाल गांवों की हकीकत निरीक्षण टीम से दूर रखी गई?
क्या निरीक्षण के बाद कागजों में सब कुछ बेहतर दिखाकर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर जमीनी हकीकत ही नहीं देखी गई तो सरकार को वास्तविक स्थिति का पता कैसे चलेगा?
अब देखने वाली बात होगी कि क्या यह निरीक्षण वास्तव में व्यवस्था सुधारने के लिए था या फिर सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा?
Jalaun, Jalaun | Sep 12, 2026