चुनावी मौसम में तरसौल से उठे सवालों का तूफान!
कॉलोनी के नाम पर रुपये वसूली का आरोप, मनरेगा मजदूरों के भुगतान पर सवाल—प्रधान, BLO और सचिव की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों ने उठाई उंगली
जालौन चुनावी सरगर्मी बढ़ते ही ग्राम पंचायत तरसौल में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान माता प्रसाद पाल, BLO और सचिव समेत संबंधित जिम्मेदारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कॉलोनी दिलाने के नाम पर रुपये लिए गए, लेकिन पात्र ग्रामीण आज भी सरकारी आवास के इंतजार में हैं।
सवाल यह है कि यदि योजना पात्रों के लिए है तो फिर कथित तौर पर रुपये लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
और अगर आरोप गलत हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच से स्थिति साफ क्यों न हो?
मनरेगा मजदूरों के जॉब कार्ड किसके पास?
ग्रामीणों का दावा है कि मनरेगा मजदूरों के जॉब कार्ड अपने पास रखे गए और करीब पांच वर्ष पहले किए गए काम का भुगतान अभी तक नहीं हो सका।
मजदूरों का सवाल है—पसीना हमारा, काम हमारा, फिर मेहनताना पाने के लिए दर-दर की ठोकरें क्यों?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर मनरेगा की निगरानी करने वाली व्यवस्था कहां है?
बारिश में ढहे मकान, मदद के इंतजार में परिवार
तेज बारिश के बाद तरसौल में दर्जनों मकानों के क्षतिग्रस्त अथवा ध्वस्त होने का दावा भी ग्रामीणों ने किया है।
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने प्रधान को फोन के जरिए स्थिति की जानकारी दी, लेकिन उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिली।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रधान का निवास उरई मुख्यालय में होने के कारण गांव में नियमित मौजूदगी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब प्रशासन से सीधे सवाल
- क्या कॉलोनी के नाम पर रुपये लेने के आरोपों की जांच होगी?
- क्या मनरेगा मजदूरों के पुराने भुगतान का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा?
- मजदूरों के जॉब कार्ड किसके पास थे और क्यों?
- बारिश में क्षतिग्रस्त मकानों का प्रशासनिक सर्वे हुआ या नहीं?
- पात्र ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ मिला या नहीं?
- ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी?
वोटों की आहट आई तो सवाल भी उठने लगे,
जो राज दबे थे गांव में, वो आज खुलने लगे।
हकदार के हाथ खाली, योजनाओं पर सवाल हजार,
अब जांच बताएगी—कौन सही, कौन जिम्मेदार?
नोट: यह खबर ग्रामीणों द्वारा दिए गए बयानों और लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पक्ष का जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
आपकी क्या राय है?
क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
Kalpi, Jalaun | Aug 29, 2026