10% कमीशन पर पूर्व डीजीपी ने दिया था पेपर छपाई का ठेका, ईओयू की चार्जशीट में खुलासा
पटना: बिहार सिपाही बहाली प्रश्नपत्र लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है। चार्जशीट के अनुसार, बिहार के पूर्व डीजीपी व केंद्रीय चयन पर्षद के तत्कालीन अध्यक्ष एसके सिंघल ने एक कमरे में संचालित होने वाली प्रिंटिंग प्रेस 'कालटेक्स मल्टीवेंचर' को 10 प्रतिशत कमीशन लेकर प्रश्नपत्र छापने का ठेका दिया था।
प्रिंटिंग प्रेस के निदेशक सौरभ बंदोपाध्याय और ब्लेसिंग सेक्योर के निदेशक कौशिक कुमार ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि उन्होंने कमीशन की राशि पूर्व डीजीपी के आवास के पिछले गेट पर जाकर सौंपी थी। कौशिक पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक में जेल जा चुका था और उसकी कंपनी ब्लैकलिस्टेड थी। इसके बाद उसने अगस्त 2021 में कालटेक्स नाम से नई कंपनी बनाई और बिना भौतिक सत्यापन के 2022 में मद्यनिषेध सिपाही भर्ती परीक्षा की छपाई का ठेका हासिल कर लिया। बाद में 10% कमीशन की शर्त पर ही 2023 की सिपाही बहाली परीक्षा का काम भी इसी कंपनी को दे दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि 1 अक्टूबर 2023 को हुई परीक्षा से आठ दिन पहले ही 24 सितंबर को पेपर लीक की साजिश पकड़ी जा सकती थी, जब संजीव मुखिया गिरोह के सदस्य प्रेस के दफ्तर में फोटो खींचते पकड़े गए थे, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
मामले में ईओयू की टीम पूर्व डीजीपी एसके सिंघल और उनकी पत्नी सुमिता सिंघल के बैंक खातों की जांच कर रही है, जिसके लिए दिल्ली स्थित फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) की मदद ली गई है। जांच एजेंसी द्वारा भेजे गए 44 सवालों के लिखित जवाब से ईओयू संतुष्ट नहीं है और उनसे दोबारा पूछताछ की तैयारी की जा रही है।