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'बाहरी ताकत के हाथ में ये टुकड़े-टुकड़े गैंग खेल रहा', PM मोदी की एकजुटता अपील का गिरिराज सिंह ने किया समर्थन
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सलोनी का प्रमोशन
बिहार पुलिस में आदेशों की अनदेखी: जब मुख्यालय के फरमान पर ही जिले में फेर दिया जाए पानी, तो फिर अनुशासन का दम भरना कैसा?

*अपडेट न्यूज़ बिहार कुंदन पाण्डेय की विशेष रिपोर्ट*:
बिहार पुलिस महकमे में अनुशासन, चेन ऑफ कमांड और पुलिस मुख्यालय के आदेशों के शत-प्रतिशत अनुपालन का दावा अक्सर बड़े-बड़े मंचों से किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट तस्वीर पेश कर रही है। जब खुद पुलिस महानिदेशक स्तर से जारी स्पष्ट और नीतिगत आदेशों को जिलों में ताक पर रख दिया जाए, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पुलिस मुख्यालय के आदेश सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए होते हैं। अगर पूर्व पुलिस महानिदेशक द्वारा निर्गत किए गए नीतिगत आदेश को वर्तमान व्यवस्था में भी लागू नहीं कराया जा सकता, तो फिर ऐसे आदेशों को औपचारिक रूप से निरस्त ही क्यों नहीं कर दिया जाता।
मामला बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी पुलिस आदेश संख्या 354/2026 (ज्ञापांक- एल-1/11-07-21-2026/92, दिनांक 22 जून 2026) से जुड़ा है। नए आपराधिक कानूनों के बेहतर क्रियान्वयन, कांडों के त्वरित एवं वैज्ञानिक पर्यवेक्षण और विधि-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के मद्देनजर राज्य भर के कुल 425 महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों को पुलिस निरीक्षक  स्तर के पदाधिकारियों के लिए चिन्हित किया गया था। इस आदेश में साफ तौर पर यह प्रावधान किया गया था कि अवकाश जैसी अल्पकालिक और अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर, चिन्हित 425 थानों में पुलिस निरीक्षक से नीचे के स्तर के किसी भी पदाधिकारी को थानाध्यक्ष के रूप में पदस्थापित नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी निर्देश था कि जिलों के स्वीकृत पदबल से ही इन थानों में इंस्पेक्टरों की तैनाती तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित की जाए।
इस ऐतिहासिक आदेश के निर्गत होने के बाद पुलिस महकमे के भीतर बेहतर पुलिसिंग और प्रशासनिक अनुशासन की एक नई उम्मीद जगी थी। उम्मीद थी कि बड़े और संवेदनशील थानों की कमान अनुभवी निरीक्षकों के हाथों में जाने से न केवल कांडों की डायरी और विवेचना की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि अनुसंधान एवं विधि-व्यवस्था इकाई के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। परंतु धरातल पर महीनों बीत जाने के बाद भी वही 'ढाक के तीन पात' वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। आज भी कई जिलों में इन चिन्हित थानों की कमान आदेश के विरुद्ध सब-इंस्पेक्टरों के हाथों में ही सौंपी जा रही है और मुख्यालय के सख्त आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
यह स्थिति सीधे तौर पर जिले के कप्तानों की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। पुलिस पूरी तरह से एक अनुशासित और आदेश-निर्देश पर चलने वाला विभाग है, जहां उच्चाधिकारियों के निर्देशों की तामील 100 प्रतिशत सुनिश्चित करना अनिवार्य माना जाता है। ऐसे में जब जिले के कप्तान खुद राज्य के पुलिस प्रमुख के इस महत्वपूर्ण आदेश का पालन अपने जिले में नहीं करा पा रहे हैं, तो अन्य छोटे-बड़े आदेशों के लिए 'मुख्यालय का फरमान' बताकर मातहतों पर अनुशासन का डंडा चलाना कहां तक तर्कसंगत और शोभनीय है।
यदि पुलिस महानिदेशक के हस्ताक्षरित आदेश का सम्मान जिले स्तर पर कायम नहीं रह सकता, तो फिर आम जनता और मातहत पुलिसकर्मियों के बीच पुलिसिंग के इकबाल और अनुशासन का क्या संदेश जाएगा। इस पूरे मामले को लेकर विभाग के आला अधिकारियों को संज्ञान लेने की आवश्यकता है कि या तो मुख्यालय के आदेश संख्या 354/2026 का जिलों में पूरी सख्ती से पालन कराया जाए अथवा आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त घोषित कर दिया जाए, ताकि कागजी आदेश और जमीनी हकीकत के बीच का यह विरोधाभास समाप्त हो सके।
भागलपुर में फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98 लाख रुपये का गबन, डीईओ और डीपीओ निलंबित

भागलपुर जिले में फर्जी विशिष्ट शिक्षिका तनुश्री के नाम पर एचआरएमएस पोर्टल के जरिए 98.12 लाख रुपये के अवैध वेतन निकासी मामले में शिक्षा विभाग ने बेहद सख्त कदम उठाया है। विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन विजय कुमार पांडे द्वारा दोनों अधिकारियों के निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी होते ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने और विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने को लेकर अलग से पत्र जारी किया जाएगा।
यह पूरी कार्रवाई भागलपुर के जिलाधिकारी की ओर से भेजी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। जिलाधिकारी ने नौ अक्टूबर को अपनी जांच रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें डीईओ चंदन कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के माध्यम से एचआरएमएस पोर्टल का दुरुपयोग करते हुए सुल्तानगंज प्रखंड में फर्जी विशिष्ट शिक्षिका तनुश्री के नाम पर 98,12,773 रुपये का अवैध भुगतान किया गया। इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होने के बाद जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत डीईओ को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, पूर्णिया प्रमंडल कार्यालय निर्धारित किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, फर्जी शिक्षिका को वेतन भुगतान के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आलोक में डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी। उन्हें हिरासत में लिए जाने की तिथि नौ अक्टूबर 2026 से ही अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, दरभंगा प्रमंडल कार्यालय तय किया गया है। शिक्षा विभाग के इस कड़े रुख से पूरे जिले में फर्जीवाड़े में संलिप्त अन्य कर्मियों और बिचौलियों के बीच हड़कंप का माहौल बना हुआ है।
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पुलिस संस्मरण दिवस पर डीजीपी प्रीता वर्मा सहित वरीय अधिकारियों ने अमर शहीदों को दी विनम्र श्रद्धांजलि*

*पटना*: पुलिस संस्मरण दिवस के अवसर पर कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देने वाले देश एवं राज्य के जांबाज पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर बिहार की पुलिस महानिदेशक  प्रीता वर्मा सहित बिहार पुलिस के तमाम वरीय पदाधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूतों की शहादत को नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने देश की रक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता की सुरक्षा के लिए कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर जवानों के अदम्य साहस और समर्पण को याद किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि शहीदों का यह सर्वोच्च बलिदान पुलिस बल के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
राजधानी पटना के मुख्य आयोजन के साथ-साथ इस अवसर पर राज्य के सभी जिलों में स्थित पुलिस केंद्रों में भी विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन सभी केंद्रों पर पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने मौन रखकर कर्तव्य पथ पर शहीद हुए अपने जांबाज साथियों को नमन किया और उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
जागरण में हंगामा: डांसर को थप्पड़ मारने और पिस्टल तानने का आरोप, जांच के आदेश

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बेरोजगारी से कुशासन तक, तेजस्वी यादव ने बताया बिहार का ‘दशानन’

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पटना के मसौढ़ी में रावण दहन के बाद बिगड़े हालात, भीड़ में गिरने से चार महिलाएं घायल

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बिहार चुनाव में क्यों है घमासान..
दुर्गा पूजा मेले में अचानक बिगड़ी पप्पू यादव की तबीयत, फीता काटते ही मंच पर लड़खड़ाए सांसद
अनंत सिंह को अभयदान या नीतीश की रणनीति? MLC चुनाव से पहले JDU में बढ़ी हलचल

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मोतिहारी में बेखौफ चोरों का तांडव,मंदिर का ताला काट गणेश जी का मुकुट उड़ाया, ड्यूटी में लापरवाही पर भड़के एसपी स्वर्ण प्रभात, गश्ती दल और बाइक पार्टी दोनों को किया निलंबित

मोतिहारी। नगर थाना क्षेत्र में चोरों के दुस्साहस और पुलिसकर्मियों की घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। बेखौफ अपराधियों ने एक प्रसिद्ध मंदिर को निशाना बनाते हुए मुख्य गेट का ताला काटकर चोरी की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। शातिर चोरों ने मंदिर में स्थापित भगवान श्री गणेश का कीमती मुकुट उड़ा लिया, जबकि साईं बाबा की छतरी, दानपेटी और चरण पादुका सुरक्षित बच गई। वारदात के वक्त मंदिर के पुजारी अंदर ही सोए हुए थे, जिन्हें घटना की भनक तक नहीं लगी। वहीं, मंदिर परिसर का सीसीटीवी कैमरा भी पिछले करीब डेढ़ महीने से खराब पड़ा था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। घटनास्थल की सीढ़ियों पर ताला काटने में प्रयुक्त खनती भी बरामद हुई है।
इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही मोतिहारी पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात ने बेहद कड़ा और त्वरित एक्शन लिया है। कानून-व्यवस्था और रात्रि सुरक्षा में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर गाज गिराते हुए एसपी ने मौके पर तैनात संबंधित गश्ती दल  और बाइक पार्टी दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कप्तान ने दोटूक संदेश दिया है कि आमजन और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर बरती गई लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिले के तेजतर्रार पुलिस कप्तान के कड़े निर्देश के बाद पूरा महकमा हरकत में आ गया है। मामले की तह तक पहुंचने और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए घटनास्थल पर डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक की टीम को रवाना कर दिया गया है। नगर थाना पुलिस के साथ-साथ विशेष तकनीकी टीम मंदिर के आसपास के इलाके और मुख्य मार्गों पर लगे निजी व प्रशासनिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर बहुत जल्द इस गिरोह को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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एक ही विज्ञापन, एक ही बैच फिर वेतन में भेदभाव क्यों? 2019 बैच के 86 सार्जेंटों के साथ सौतेला व्यवहार, प्रमोशन न मिलने से गहराया वेतन विसंगति का संकट

पटना / विशेष संवाददाता
पुलिस महकमे में वर्ष 2019 बैच के सार्जेंटों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश पनप रहा है। एक ही विज्ञापन और समान चयन प्रक्रिया के जरिए बहाल हुए पुलिसकर्मियों के बीच विभाग द्वारा की गई व्यवस्था ने गंभीर वेतन विसंगति को जन्म दे दिया है। 2019 बैच के कुछ सार्जेंटों को सार्जेंट मेजर के पद पर पदोन्नति देकर उच्च वेतनमान का लाभ सौंप दिया गया, वहीं दूसरी ओर इसी बैच के 86 सार्जेंटों को "सीटों की रिक्तियां न होने" का हवाला देकर पदोन्नति और वित्तीय लाभ दोनों से वंचित कर दिया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर पद सीमित होना स्वाभाविक माना जा सकता है, परंतु एक ही विज्ञापन से चयनित सहकर्मियों के बीच वेतन का यह भारी अंतर किसी भी सेवा नियम या न्याय के सिद्धांत पर खरा नहीं उतरता।
प्रभावित पुलिसकर्मियों का सीधा सवाल है कि जब नियुक्ति की शर्तें, योग्यता, बैच और विज्ञापन एक ही थे, तो फिर वित्तीय लाभ में यह दोहरा मापदंड कैसे जायज ठहराया जा सकता है। पद की उपलब्धता न होने की स्थिति में भी सेवा नियमों और न्यायिक नजीरों के तहत समान बैच के कर्मियों को नोशनल प्रमोशन अथवा पे-प्रोटेक्शन देकर वेतन विसंगति को दूर किया जाता है। इसके बावजूद 86 सार्जेंटों को उनके साथियों से कम वेतन पर कार्य करने को मजबूर किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत मिलने वाले समानता के अधिकार का हनन है।
विभाग के इस मनमाने रवैये से कर्मियों का मनोबल बुरी तरह टूट रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि विभाग रिक्तियों की कमी का हवाला देकर पद नहीं दे सकता, तब भी एक ही बैच के सभी कर्मियों को समान वित्तीय उन्नयन और वेतनमान देना अनिवार्य है। महकमे के भीतर गहराती इस विसंगति को यदि समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह मामला विधिक पचड़े और न्यायालय की चौखट तक पहुंचना तय माना जा रहा है। Bihar Police Samrat Choudhary Nitish Kumar VIJAY KUMAR SINHA Dr. Prem Kumar PMO India Tejashwi Yadav Mangal Pandey
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फौलोवर बढ़वा लो