
अरवल की धरती पर दो ऐसे पुलिस अधिकारी, जिनके तबादले पर लोगों की आंखें हो गई थीं नम।
आईपीएस मोहम्मद कासिम और एसडीपीओ राजीव रंजन ने पुलिस-पब्लिक के रिश्ते को दी थी नई पहचान,
आज भी अपराध पर अंकुश लगाने की मिसाल के रूप में याद किए जाते हैं दोनों अधिकारी
अरवल की पुलिसिंग के इतिहास में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो अपने पद से हटने के बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखते हैं। उनके काम की चर्चा केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि गांवों की चौपालों, बाजारों और आम लोगों की बातचीत में भी होती है। अरवल के लिए आईपीएस मोहम्मद कासिम और एसडीपीओ राजीव रंजन ऐसे ही दो नाम हैं, जिन्हें आज भी लोग सम्मान के साथ याद करते हैं। इन दोनों अधिकारियों ने अपने कार्यकाल के दौरान पुलिस और पब्लिक के बीच ऐसा भरोसा कायम किया था, जो किसी भी जिले की कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी ताकत होती है। आम लोगों को यह विश्वास होने लगा था कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए है और अपराध करने वालों पर कार्रवाई होगी। यही भरोसा इन अधिकारियों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। कहा जाता है कि इनके कार्यकाल में अरवल में अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ था। छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं से लेकर गंभीर आपराधिक मामलों तक, अपराधियों के बीच पुलिस का खौफ और आम लोगों के बीच सुरक्षा का विश्वास चर्चा का विषय बना रहता था। लोगों को उम्मीद थी कि पुलिस की यही सक्रियता और सख्ती आगे भी जारी रहेगी। लेकिन जब दोनों अधिकारियों का तबादला हुआ, तो लोगों की भावनाएं खुलकर सामने आईं। विदाई के समय कई घरों में चूल्हे नहीं जले और लोगों की आंखें नम हो गईं—यह बात आज भी उनके प्रति लोगों के लगाव को बयां करने के लिए कही जाती है। किसी पुलिस अधिकारी के तबादले पर आम लोगों का इस तरह भावुक होना अपने आप में बताता है कि उसने जनता के बीच किस तरह का विश्वास अर्जित किया होगा।
तबादला हुआ, लेकिन लोगों के दिलों से नहीं मिटे नाम
सरकारी सेवा में तबादला एक सामान्य प्रक्रिया है। अधिकारी आते हैं और फिर दूसरे स्थान पर अपनी जिम्मेदारी संभालने चले जाते हैं। लेकिन सभी अधिकारी जनता के दिलों में स्थायी जगह नहीं बना पाते। आईपीएस मोहम्मद कासिम और एसडीपीओ राजीव रंजन के प्रति अरवल के लोगों का लगाव इसी अंतर को दिखाता है।आज भी जब अरवल में अपराध पर नियंत्रण, पुलिस की सक्रियता और जनता के साथ बेहतर संबंधों की चर्चा होती है, तो इन दोनों अधिकारियों का उदाहरण दिया जाता है। लोग इनके कार्यकाल को याद करते हुए कहते हैं कि पुलिस की असली ताकत केवल वर्दी, पद या अधिकार में नहीं, बल्कि जनता के विश्वास में होती है।इन दोनों अधिकारियों की कहानी यह संदेश भी देती है कि कानून का सख्ती से पालन कराने के साथ-साथ जनता के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए, तो पुलिस और समाज के बीच की दूरी कम हो सकती है। अपराधियों के मन में कानून का भय और आम लोगों के मन में पुलिस के प्रति भरोसा—यही बेहतर पुलिसिंग की पहचान है।अरवल के लिए वे केवल अधिकारी नहीं, भरोसे की पहचान बन गए। वक्त बीत गया, जिम्मेदारियां बदल गईं और दोनों अधिकारी दूसरे स्थानों पर चले गए, लेकिन उनके काम की यादें आज भी लोगों की जुबान पर हैं। यही किसी अधिकारी के कार्यकाल की सबसे बड़ी कसौटी है कि उसके जाने के बाद भी लोग उसे याद करें और उसके काम को उदाहरण बनाकर पेश करें।
कुछ चेहरे पद से पहचाने जाते हैं, लेकिन कुछ अपने काम से इतिहास में जगह बना लेते हैं। अरवल के लोगों की यादों में आईपीएस मोहम्मद कासिम और एसडीपीओ राजीव रंजन की पहचान ऐसे ही अधिकारियों के रूप में बनी हुई है।
Arwal, Arwal | Oct 20, 2026