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बब्लू सिन्हा

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सीतामढ़ी में जिला परिषद प्रतिनिधि की 8 गोली मारकर हत्या,भीड़ ने आरोपी का घर फूंका, 2 इंस्पेक्टर के सिर फूटे-8 गाड़ियां तोड़ीं, थाना अध्यक्ष सस्पेंड।
सरकारी विद्यालय की अंतिम बेंच पर बैठे जिलाधिकारी 

आज के दौर में अक्सर यह धारणा बन गई है कि बड़े अधिकारी वातानुकूलित दफ्तरों और बंद कमरों तक ही सीमित रहते हैं। लेकिन मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव ने अपनी कार्यशैली से इस धारणा को बदलने की कोशिश की है। विद्यालय निरीक्षण के दौरान उन्होंने किसी विशेष कुर्सी पर बैठने के बजाय बच्चों के बीच जाकर कक्षा की अंतिम बेंच पर बैठना चुना। उनकी यह तस्वीर एक संवेदनशील, सरल और जमीन से जुड़े अधिकारी की कार्यशैली को बयां करती है।कुमार गौरव सर ने बच्चों के साथ बैठकर उनकी पढ़ाई, किताबों, शिक्षकों की पढ़ाने की शैली और विद्यालय की व्यवस्था के बारे में सीधे बातचीत की। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बच्चे वास्तव में क्या सीख रहे हैं और उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह निरीक्षण महज औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को करीब से समझने का प्रयास नजर आया।जिम्मेदार और जवाबदेह अधिकारी वही है, जो सवालों को सुने, समस्याओं को समझे और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के लिए खुद धरातल पर उतरे। अंतिम बेंच पर बैठा जिलाधिकारी इसी सोच का संदेश देता है कि प्रशासन केवल फाइलों और कार्यालयों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के बीच पहुंचकर वास्तविकता को समझना भी उसकी जिम्मेदारी है।एक सच्चा प्रशासक वह है जो फाइलों से निकलकर जमीन पर पहुंचे, लोगों की बात सुने और समस्याओं के समाधान की दिशा में तत्काल पहल करे। बच्चों के बीच बैठकर उनकी बात सुनना प्रशासन और समाज के बीच विश्वास की एक मजबूत तस्वीर पेश करता है। कुमार गौरव सर की यह सादगी और संवेदनशील कार्यशैली इस बात की मिसाल है कि अधिकारी जब अपनी कुर्सी से नीचे उतरकर आम लोगों के बीच बैठता है, तो प्रशासन की दूरी कम होती है और भरोसा बढ़ता है। अंतिम बेंच पर बैठा जिलाधिकारी सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि जवाबदेह और जनसरोकार वाले प्रशासन की सोच का प्रतीक बन जाता है।
@highlight District Administration Muzaffarpur
Vibing to the 80s trend… <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelschallenge nis:value=viralreelschallenge nis:enabled=true nis:link/> 

<nis:link nis:type=tag nis:id=vibingtothe80s nis:value=VibingToThe80s nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=80snostalgia nis:value=80snostalgia nis:enabled=true nis:link/>
<nis:link nis:type=tag nis:id=अरवल nis:value=अरवल nis:enabled=true nis:link/> के कुर्था में ग्रामीणों ने बीडीओ को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।
<nis:link nis:type=tag nis:id=अरवल nis:value=अरवल nis:enabled=true nis:link/> कुर्था प्रखंड में डूबने वाले छात्र का शव बरामद
3 years later 🗓⏳👣
बिहार में जननेता एक ही है पप्पू यादव है।

<nis:link nis:type=tag nis:id=लेकिन? nis:value=लेकिन? nis:enabled=true nis:link/>
दिल्ली के जंतर-मंतर विवाद के बाद चर्चा में आए स्वतंत्र भारद्वाज के पैतृक गांव ओझौल में भी उनके समर्थन में आवाज उठने लगी है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोनों पक्षों की भूमिका की जांच हो। ग्रामीणों ने स्वतंत्र से पुराना जुड़ाव बताते हुए समर्थन जताया और न्यायपालिका पर भरोसा जताया।
देश ही दिमागी नक्सल के हाथ में है।
पसीने की कमाई खाने वालों का दिवाला नहीं निकलता, दिवाला उन्हीं का निकलता है जो दूसरों की कमाई खा-खाकर मोटे होते हैं।
मिजाज ए हिन्दुस्तान कितना आला है ,
बुर्के में खाला और गोद में नन्दलाला है।।

हैप्पी जन्माष्टमी
गरीबों के बच्चे ऐसे विद्यालय में  पढ़ेंगे तो कौन सा सपना साकार होगा?
Gen Alfa n ने स्कूल में जड़ा ताला

ARWAL District Administration
हमारे बेहद प्रिय मित्र और प्रभात खबर के छायाकार भाई सतेंद्र कुमार की धर्मपत्नी के निधन की खबर ने मुझे भीतर तक झकझोर कर रख दिया। यह खबर सुनकर मन स्तब्ध है। बीते 12 दिनों से वह एम्स में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं। सर्पदंश के बाद परिवार और हम सभी शुभचिंतकों को पूरी उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।आज एक मां अपने दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों को हमेशा के लिए छोड़कर चली गईं। उन बच्चों को शायद अभी यह भी पूरी तरह समझ नहीं होगा कि उनकी मां अब कभी उन्हें गोद में नहीं उठाएंगी, उनके सिर पर हाथ नहीं फेरेंगी और उनकी छोटी-छोटी खुशियों में मुस्कुराएंगी नहीं। यह सोचकर ही कलेजा कांप उठता है। भाई सतेंद्र कुमार मेरे लिए सिर्फ एक साथी पत्रकार नहीं, बल्कि बेहद अच्छे और आत्मीय मित्र हैं। ऐसे दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े होने के लिए शब्द बहुत छोटे लग रहे हैं। एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया, जिसकी भरपाई शायद जीवन भर नहीं हो सकेगी। ईश्वर, ऐसा नहीं करना चाहिए था। आखिर उस परिवार का क्या दोष था? मासूम बच्चों से उनकी मां क्यों छीन ली? ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और भाई सतेंद्र कुमार सहित पूरे परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति दें। बच्चों के सिर से मां का साया उठना सबसे बड़ा दुख है। 

भावपूर्ण श्रद्धांजलि। ॐ शांति।
न‌ शहर का शोर शराबा, न कोई झूठा दिखावा है 
प्रकृति की गोद में ही मिलता असली बुलावा है....
जहरीला
लौटा जब वो बिना जुर्म की सजा काटकर,
सारे परिंदे रिहा कर दिए उसने घर आकर.....
मित्तर.....
वो वक़्त गुजर गया जब तेरी हसरत थी हमे ,
अब तु खुदा भी बन जा तो भी हम सजदा नही करेंगे ..!!
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CNG 3.96 रूपया महंगा
चीनी के बाद दूध में उबाल

अब कोई दूसरा चाय वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है? 
बस एक ही महामानव
गजब के न्यूज़ प्रस्तोता है खाली हाथ जाने के लिए दलाली में लगे हुए हैं।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पटना में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के निजी सचिव 2011 बैच के आईएएस अधिकारी ऋषिेंद्र कुमार से आत्मीय मुलाकात हुई। कॉफी के साथ हुई इस खास मुलाकात में आत्मीय संवाद और यादगार पल साझा....
आज चुनाव हुआ तो अरुणपुरी प्रधानमंत्री कली पूरी गृह मंत्री और चाटुकार मीडिया के लिजलिजे समाचार प्रस्तोता कैबिनेट मंत्री होंगे। Aaj Tak को 288 सीटे मिलेगी। इनकी विश्वसनीयता 157 पर है।
कलाई पर भाई की,अपने हिस्से की सारी दुआयें बांधती है बहन….❤

 रक्षाबंधन...🧡
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