
जो औरत कभी घर की चारदीवारी से बाहर नहीं निकली, जिसने पहली बार किसी बड़े मंच पर आकर अपनी बात रखी हो… उस पल की भावनाओं को भी समझना चाहिए।
जब एक पत्नी पहली बार मंच साझा करते हुए बोलती है और उसकी बात सुनकर पति की आंखें नम हो जाती हैं, तो वह दृश्य भावनाओं से भरा होता है। ❤️
मंत्री जी का अपनी पत्नी को गले लगाना कोई गलत बात नहीं थी।
उन्होंने किसी गैर महिला को नहीं, बल्कि अपनी पत्नी को गले लगाया था।
जो महिलाएं पूरी जिंदगी चूल्हे-चौके और परिवार की जिम्मेदारियों में गुजार देती हैं, उनके लिए पहली बार मंच पर बोलना कितना बड़ा क्षण होता है, इसे वही समझ सकता है जिसने उस पल को महसूस किया हो।
अगर बेटी किसी मंच पर आगे बढ़कर कुछ कहे और भावुक होकर पिता के गले लग जाए, तो क्या उसमें भी कोई गलत बात है?
नहीं… वह प्यार है, अपनापन है और भावनाओं का सम्मान है।
पति-पत्नी के रिश्ते में अगर किसी भावुक पल में आंखें नम हो जाएं और पति अपनी पत्नी को गले लगा ले, तो उसे गलत नजर से देखने के बजाय उस रिश्ते की भावनाओं को समझना चाहिए।
गलत इंसान गलत होता है, लेकिन हर भावनात्मक पल को गलत नजर से देखना भी सही नहीं।
दद्दू प्रसाद जी को पता है कि मंच क्या होता है, मर्यादा क्या होती है और सही-गलत का फर्क क्या होता है।
कभी-कभी तस्वीर सिर्फ तस्वीर नहीं होती…
उसके पीछे वर्षों का साथ, संघर्ष, सम्मान और अपनापन छिपा होता है। ❤️🙏
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Mahoba, Mahoba | Sep 10, 2026