
बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए खरीफ मौसम की फसलों के लिए नवीन उन्नतशील किस्में
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कृषि विज्ञान केन्द्र टीकमगढ़ में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार साथ ही केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एस. के. जाटव, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. यू.एस. धाकड़, डॉ. सतेन्द्र कुमार, डॉ. आई.डी. सिंह एवं जयपाल छिगारहा द्वारा किसानों को खरीफ मौसम में क्षेत्र विशेष के लिए अनुशंसित उन्नत एवं उच्च उत्पादन किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई है।
उचित किस्मों के चयन से वर्षा आधारित परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मौसम का पूर्वानुमान देखकर सही समय पर बुआई करें। बारिश के मौसम में बीज जल्दी रोग से ग्रसित हो सकते हैं इसलिए बुआई से पहले बीजों को उपचारित करें। फसल को फफूँद जनित बीमारियों से बचाने के लिए जैविक फफूँदनाशक दवा ट्राईकोडर्मा विरिडी 10 मि.ली. या रासायनिक दवा विटावैक्स पॉवर 2 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीजोपचार कर बुवाई करना चाहिए। वर्षा के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर बुवाई का समय तय करना चाहिए। विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखनी चाहिए। उन किस्मों का चयन करना चाहिए जो अधिक उपज देने वाली, रोग एवं कीट प्रतिरोधी साथ ही कम अवधि में तैयार होनी वाली हों।
उड़द की पीला मौजेक प्रतिरोधक किस्में - इंदिरा उड़द प्रथम, मुकुंदरा, प्रताप उड़द 1, प्रताप उड़द 9, आई.पी.यू. 13-1, कोटा उड़द-2, कोटा उड़द-3, टी.जे.यू.-339 आदि,
सोयाबीन की उन्नत किस्में - जे.एस. 20-116, जे.एस. 20-34, जे.एस. 20-94, जे.एस. 20-98, राज सोया 18, आदि,
तिल की उन्नत किस्में - टी.के.जी. 306, टी.के.जी. 308, जी.टी. 4, जी.टी. 6,
मूँगफली की उन्नत किस्में - जी.जे.जी.-32, टी.सी.जी.एस. 1694, लेपाक्षी, जे.एल. 501, जे.जी.एन. 3,
धान की उन्नत किस्में - जे.आर. 201, जे.आर. 81, जे.आर. 345, पूसा सुगंध 4, पूसा सुगंध 3, एम.टी.यू. 1010 एवं अरहर की उन्नत किस्में - पूसा अरहर 16, पूसा 33, टी.जे.टी. 501, राजीव लोचन आदि हैं।
उन्नत किस्मों की उपलब्धता हेतु म.प्र. राज्य बीज प्रक्रिया 4 नं. फार्म, कुण्डेश्वर रोड टीकमगढ़ तथा राष्ट्रीय बीज निगम निवाड़ी से सम्पर्क कर समय से बीज खरीदने का कार्य करें। जैविक खाद का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और फसलें मजबूत होती हैं।
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