
फर्रुखाबाद में अवैध नर्सिंग होमों की खैर नहीं: स्वास्थ्य विभाग चलाएगा विशेष जांच अभियान, बिना पंजीकरण वाले अस्पतालों पर होगी सख्त कार्रवाई
फर्रुखाबाद। जनपद में बिना वैध पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों और अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना ली है। आमजन को सुरक्षित और मानक के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपद में एक सघन और विशेष निरीक्षण अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
अभियान की मुख्य रूपरेखा
इस अभियान का संचालन उप मुख्य चिकित्साधिकारी एवं निजी चिकित्सालय पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ. आर.सी. माथुर की देखरेख में किया जाएगा। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत संस्थानों में मरीजों का उपचार कराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ है।
निरीक्षण के दौरान इन मानकों की होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीमें अस्पतालों में निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन पड़ताल करेंगी:
पंजीकरण प्रमाण-पत्र: संस्थान का वैध पंजीकरण है या नहीं।
चिकित्सकीय मानक: योग्य चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता।
सुरक्षा मानक: अग्निशमन (Fire Safety) व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं।
जीवनरक्षक उपकरण: गंभीर मरीजों के इलाज हेतु आवश्यक उपकरणों की स्थिति।
अपशिष्ट प्रबंधन: जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (Bio-Medical Waste) का सही निस्तारण।
उल्लंघन पर होगी कड़ी विधिक कार्रवाई
मुख्य चिकित्साधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि निरीक्षण के दौरान कोई भी अस्पताल बिना पंजीकरण के पाया जाता है या निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहा होता है, तो उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश निजी चिकित्सालय अधिनियम और अन्य प्रासंगिक नियमों के तहत कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक विभागों का सहयोग लेकर ऐसे संस्थानों को सील करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
जनता से स्वास्थ्य विभाग की अपील
डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपद वासियों को जागरूक रहने की सलाह दी है:
सतर्क रहें: किसी भी निजी अस्पताल में उपचार शुरू कराने से पहले उसका वैध पंजीकरण प्रमाण-पत्र और वहां उपलब्ध सुविधाओं की पुष्टि जरूर करें।
सूचना दें: यदि आपको अपने क्षेत्र में बिना पंजीकरण के संचालित किसी अस्पताल या नर्सिंग होम की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें। विभाग ऐसी हर सूचना पर गंभीरता से कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
इस अभियान का उद्देश्य जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाना है, ताकि मरीजों को जीवनरक्षक उपचार पूरी सुरक्षा के साथ मिल सके।