
सोशल मीडिया के आपत्तिजनक पोस्ट पर पटना आईआईटी रजिस्ट्रर ने दी सफाई, कहा - फर्जी पोस्ट के जरिए छवि धूमिल करने की हो रही है कोशिश
✍️ गोपाल विद्यार्थी | पटना
सोशल मीडिया पर अपने नाम से कथित रूप से प्रसारित आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर मीडिया में सामने आई खबरों पर आईआईटी पटना के रजिस्ट्रार डॉ. ए.के. ठाकुर ने कड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट और उससे जुड़े आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी समुदाय, वर्ग अथवा नीति के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी या पोस्ट नहीं की है।
डॉ. ठाकुर की ओर से जारी पोस्ट एवं प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिस कथित पोस्ट के आधार पर उनका नाम जोड़ा जा रहा है, वह फर्जी हो सकती है अथवा उनके नाम और सोशल मीडिया आईडी का इस्तेमाल कर क्लोन पोस्ट तैयार की गई हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विरोधी तत्व बिना किसी ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य के उनके खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह के अभियान का उद्देश्य उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आईआईटी पटना की छवि को भी प्रभावित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित पोस्ट से उनका किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है और न ही वह उसमें व्यक्त विचारों का समर्थन करते हैं। डॉ. ठाकुर ने अपने संस्थान में कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि एससी-एसटी सेल के संपर्क अधिकारी उनके साथ विभिन्न समितियों में कार्य कर चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान इस तरह की किसी गतिविधि की जानकारी सामने नहीं आई है, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है।
डॉ. ठाकुर ने डिजिटल सामग्री की प्रमाणिकता को लेकर भी सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक और सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग के दौर में किसी पोस्ट या डिजिटल सामग्री को बिना सत्यापन के वास्तविक मान लेना उचित नहीं है।
उन्होंने मीडिया में प्रसारित आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ चलाए जा रहे इस कथित अभियान का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। साथ ही उन्होंने संबंधित लोगों से अपुष्ट सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों और प्रमाणों की जांच करने की अपील की।