
भरत तिवारी एनकाउंटर: अपनी ही पार्टी में घिरे सीएम सम्राट, NDA के भीतर बढ़ी बेचैनी
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। जिस मामले पर शुरुआती दौर में सरकार और सत्ता पक्ष के कुछ नेता पुलिस कार्रवाई के समर्थन में दिख रहे थे, उसी मामले पर अब एनडीए के भीतर अलग-अलग आवाजें उठने लगी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस प्रकरण ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है और विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दलों तथा अपने गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद मामला तेजी से गरमाया। परिवार और ग्रामीणों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए न्याय की मांग की, जबकि पुलिस की ओर से कार्रवाई को परिस्थितियों के अनुरूप बताया गया। इसके बाद गांव में लगातार नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों का पहुंचना जारी रहा। देखते ही देखते यह स्थानीय मामला राज्यव्यापी राजनीतिक मुद्दे में बदल गया।
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब एनडीए के कई नेताओं के बयान सामने आने लगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री Ashwini Choubey ने घटना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की। वहीं जेडीयू नेता Sanjay Jha ने भी इस मामले पर सवाल खड़े किए। बिहार सरकार के मंत्री Ashok Choudhary ने भी पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इसे गंभीर मामला बताया।
बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री Mithlesh Tiwari ने भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया कि क्या पुलिस ने परिस्थितियों के अनुरूप कदम उठाया था या कार्रवाई में कहीं चूक हुई।
इसी बीच बिहार पुलिस की ओर से भी यह माना गया कि पूरे घटनाक्रम में कुछ स्तर पर चूक हुई है। मामले की जांच शाहाबाद DIG को सौंपे जाने की बात सामने आई और बाद में सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए।
मामले में कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ी है। भरत तिवारी की मां की शिकायत पर कुछ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ हत्या से जुड़ी FIR दर्ज किए जाने की खबर सामने आई। इसमें SDPO और थाना स्तर के अधिकारियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं।
विपक्ष ने भी इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया है। Tejashwi Yadav सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरा और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।
हालांकि यह कहना कि “सभी NDA नेता एक सुर में एनकाउंटर को गलत बता रहे हैं” पूरी तरह सटीक नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि सत्ता गठबंधन के भीतर इस मामले को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं और इससे राजनीतिक दबाव बढ़ा है। अब सबकी नजर न्यायिक जांच पर है, क्योंकि उसी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस कार्रवाई उचित थी या परिवार और समर्थकों के आरोप सही थे।
Chapra, Saran | Jun 23, 2026