
बच्चा रावी में नहीं फेंका गया, बल्कि छिपाया गया है- माँ
चंबा
अपने हक के लिए उठी मां की आवाज अब अपने ही बच्चे तक पहुंचने की गुहार में बदल गई है। सारिका का आरोप है कि ससुराल में लगातार दबाव और कथित प्रताड़ना का विरोध करने पर उन्हें बच्चे से अलग कर दिया गया।
अब वह पुलिस के दरवाजे पर दस्तक देकर बच्चे को तलाशने, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं। महिला ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। महिला का दावा है कि बच्चा रावी नदी में नहीं फेंका गया बल्कि कहीं छिपाकर रखा गया है और वह सुरक्षित है। उन्होंने पुलिस से बच्चे को तलाश कर सुरक्षित वापस दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महिला का कहना है कि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई तो बच्चे से दूर कर दिया गया। ऑनलाइन पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के साथ महिला थाना में भी मामला पहुंचने की बात कही है। महिला के अनुसार ससुराल पक्ष की ओर से मायके से कभी 20 हजार, कभी 50 हजार और कभी डेढ़ लाख रुपये लाने का दबाव बनाया जाता था। आरोप है कि पति उन्हें अपनी मर्जी से चलने के लिए मजबूर करता था। महिला का दावा है कि पति दूसरी महिला से संबंध रखता है। पिछले छह-सात माह से उसे घर भी लाता था। विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। महिला ने बताया कि वर्ष 2024 में भी उनके साथ मारपीट हुई थी। बाद में परिजनों ने यह सोचकर दोबारा ससुराल भेज दिया कि परिवार बस जाएगा। आरोप है कि वह महिला मंडल तक गईं लेकिन वहां भी पति ने उन्हें खुलकर बात नहीं करने दी। पति ने फोन पर बच्चे को पुल के पास ले जाने और उसे गिराने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने एक बार वीडियो भेजकर पुल के पास बैठे होने का दावा किया। महिला का कहना है कि 17 जुलाई को भी इसी तरह का घटनाक्रम हुआ था और 112 पर शिकायत के बाद पति ने इसे मजाक बताया था। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि बच्चे की मां को पुलिस के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए जिससे पुलिस निष्पक्षता से पूरे घटनाक्रम की जांच कर सके।