
फिजूलखर्ची और गैर-इस्लामी रस्मों पर रोक को लेकर जमीअत उलेमा झारखंड की बैठक, कई अहम फैसलों पर लगी मुहर
चान्हो: जमीअत उलेमा झारखंड के तत्वावधान में शादी-ब्याह में बढ़ती फिजूलखर्ची एवं गैर-इस्लामी रस्मों को समाप्त करने के उद्देश्य से चान्हो प्रखंड के चटवल मोड़ स्थित मस्जिद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मौलाना रफीक मजाहिरी ने की, जबकि इसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के उलेमा, गांव के अंजुमन के लोग ओ सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
बैठक में समाज में सादगीपूर्ण एवं शरीयत के अनुसार निकाह को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। तय किया गया कि निकाह मस्जिद में पढ़ाया जाए तथा रात में होने वाली शादियों की परंपरा को समाप्त किया जाए। साथ ही लड़की पक्ष के यहां किसी प्रकार की दावत या जियाफत का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में वलीमा अथवा शादी समारोह में लिफाफा (नकद उपहार) देने की रस्म को खत्म करने, लड़के पक्ष से निकाह के नाम पर किसी प्रकार की अतिरिक्त फीस नहीं लेने तथा केवल काजी साहब की निर्धारित फीस अदा करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा डीजे सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, मैरिज हॉल में भी सादगीपूर्ण निकाह को प्रोत्साहित करने तथा बारात ले जाने की रस्म को समाप्त करने पर सहमति बनी।
उलेमाओं ने दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि बेटियों को दहेज देने के बजाय शरीयत के अनुसार विरासत में उनका अधिकार दिया जाए। वहीं हल्दी, मेहंदी और अन्य गैर-शरई रस्मों एवं रिवाजों को खत्म करने का भी निर्णय लिया गया। वलीमा की दावत में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने तथा विधवा एवं तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करने और हर संभव सहयोग करने का भी संकल्प लिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए जमीअत उलेमा झारखंड के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल कयूम कासमी ने कहा कि आज मुस्लिम समाज में इस्लामी तरीके से होने वाली सादगीपूर्ण शादियों को छोड़कर दिखावे और फिजूलखर्ची का चलन बढ़ता जा रहा है, जिससे आसान निकाह भी मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि निकाह को आसान और समाज को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्त करने के लिए इस तरह की मुहिम लगातार जारी रहेगी।
अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना रफीक मजाहिरी ने कहा कि बैठक में लिए गए फैसलों से समाज के गरीब और अमीर सभी वर्गों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस्लामी तरीकों के अनुसार शादी-ब्याह सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उठानी होगी, तभी इन निर्णयों का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
बैठक में हाजी तैयब, मौलाना जाहिद, मौलाना गाजी सलाउद्दीन, रहमतुल्लाह अंसारी जावेद खान अल्ताफ़ अंसारी, मौलाना रफीक, शफीक अंसारी, अबरारुल हक, हाफिज तज्जमुल, मौलाना अबुल कलाम, महबूब आलम, आशिक अंसारी, कारी सुल्तान, मुफ्ती इम्तियाजुर रहमान, मौलाना अब्दुल माजिद जावेद अख्तर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
Chanho, Ranchi | Jun 18, 2026