अंजुमन फरोग ए उर्दू की वार्षिक बैठक ,भाषा के विकास पर मंथन
झारखंड में उर्दू अकादमी का गठन और शिक्षकों की बहाली की उठी माँग
रांची: राजधानी रांची के कर्बला चौक स्थित गुलशन मैरिज हॉल में शनिवार को 'अंजुमन फरोग-ए-उर्दू झारखंड' की वार्षिक बैठक हुई। बैठक में राज्य में उर्दू भाषा के संरक्षण, प्रसार और उर्दू भाषी छात्रों के भविष्य को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद इकबाल ने भावी योजनाओं का खाका पेश किया, वहीं केंद्रीय सचिव मोहम्मद गालिब नश्तर ने पिछले पांच वर्षों का रिपोर्ट कार्ड रखते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही आज अंजुमन को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है।
बैठक के दौरान झारखंड में उर्दू भाषा की वर्तमान स्थिति की गहरी समीक्षा की गई और कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। राज्य सरकार से मांग की गई कि प्रदेश में अविलंब उर्दू अकादमी का गठन करे और उसे पूरी तरह सक्रिय करे। इसके साथ ही उर्दू स्कूलों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े उर्दू शिक्षकों के पदों पर तत्काल बहाली की मांग पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी दफ्तरों में उर्दू भाषा का उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों पर हिंदी के साथ-साथ उर्दू में भी साइनबोर्ड लगाए जाएं। इसके अलावा उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष स्कॉलरशिप, करियर काउंसलिंग और कोचिंग की व्यवस्था शुरू करने पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।
*अक्टूबर में जुटेगा देशभर के विद्वानों का जमावड़ा*
संस्था के एजेंडे में आगामी अक्टूबर माह में प्रस्तावित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। सेमिनार के प्रभारी डॉ. दानिश हम्माद जाज़िब ने जानकारी दी कि इसका विषय याद-ए-रफ्तगान झारखंड (झारखंड की दिवंगत साहित्यिक शख्सियतों की याद में) रखा गया है। इसके लिए देश भर के शोधकर्ताओं से 50 फीसदी से अधिक मक़ाले (शोध पत्र) प्राप्त हो चुके हैं, जबकि शेष जुलाई तक आने की उम्मीद है। यह राज्य का एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन होगा, जिसमें देशभर के नामचीन उर्दू विशेषज्ञ और विद्वान शिरकत करेंगे।
इससे पूर्व, कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हाफिज मोहम्मद दानिश अयाज़ द्वारा कुरान की तिलावत से हुआ। इसके पश्चात मोहम्मद मुकर्रम हयात ने शायर दिलशाद नज़्मी की खूबसूरत नज़्म पेश कर महफिल में समां बांध दिया।
बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने उर्दू के विकास पर अपने बेबाक विचार रखे। इनमें मुख्य रूप से हाजी रईस खान, दिलशाद नज़्मी, अरशद जमाल, डॉ. जाहिद इकबाल, मो. सैफ उल हक, डॉ. शाहनवाज़ खान नमकीन, डॉ. शगुफ्ता बानो, राशिद जमाल, मुकर्रम हयात, मो. आरिफ, डॉ. अब्दुल बासित, शगूफा तहज़ीब, सरफराज़ आलम कादरी, मो. आसिफ, मंसूर आलम, मो. तहसीन और आरिब हम्माद शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दानिश हम्माद जाज़िब ने किया, जबकि अंत में हिना आफरीन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
Chanho, Ranchi | Jun 20, 2026