
सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन से बदलेगा देश : बसंत चौधरी
बोले—गांव और ब्लॉक को विकास का केंद्र बनाकर ही मजबूत होगी अर्थव्यवस्था, किसान-युवा को मिले स्थानीय अवसर
बस्ती। देश में समय-समय पर हुए राजनीतिक, छात्र और सामाजिक आंदोलनों ने सत्ता और राजनीति को जरूर प्रभावित किया, लेकिन आम आदमी की जिंदगी में अपेक्षित बुनियादी बदलाव नहीं आ सका। देश को अब केवल सत्ता परिवर्तन की राजनीति से आगे बढ़कर व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में सोचने की जरूरत है। यह बातें पूर्व लोकसभा प्रत्याशी बस्ती एवं श्री कृष्णा मिशन हॉस्पिटल के चेयरमैन बसंत चौधरी ने कहीं।
बसंत चौधरी ने कहा कि किसी व्यक्ति, दल या नेता का सत्ता में आ जाना व्यवस्था परिवर्तन नहीं है। सत्ता बदलने से चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन यदि प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक प्राथमिकताएं और विकास का मॉडल वही रहे तो आम नागरिक के जीवन में बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता स्वयं लक्ष्य नहीं, बल्कि जनता का जीवन बेहतर बनाना उसका उद्देश्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक व्यवस्था में आम नागरिक टैक्स देकर महत्वपूर्ण योगदान करता है। ऐसे में व्यवस्था की प्राथमिकता भी आम नागरिक को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। सवाल यह है कि जब धन नीचे से ऊपर की ओर जाता है तो सुविधाएं उसी अनुपात में ऊपर से नीचे क्यों नहीं पहुंचतीं।
ब्लॉक स्तर पर विकसित हों आधुनिक सुविधाएं
बसंत चौधरी ने कहा कि विकास की शुरुआत गांव और ब्लॉक स्तर से होनी चाहिए। प्रत्येक विकासखंड को केवल सरकारी कार्यालयों का केंद्र बनाने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, व्यापार, बैंकिंग, डिजिटल सेवाओं और छोटे उद्योगों का केंद्र बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर पर अच्छे अस्पताल, आधुनिक विद्यालय, कौशल विकास केंद्र, मंडी, कोल्ड स्टोरेज, बैंकिंग सुविधाएं और स्थानीय रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे तो गांवों से बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन काफी हद तक रोका जा सकता है।
किसान को उत्पादन से बाजार तक मिले हिस्सा
कृषि व्यवस्था पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। किसान की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उसे उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में कृषि में आधुनिक तकनीक को गांवों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने ड्रोन, सेंसर आधारित सिंचाई, मौसम आधारित कृषि सलाह, मृदा परीक्षण, आधुनिक बीज, माइक्रो इरिगेशन, फसल प्रसंस्करण और वैज्ञानिक भंडारण जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। कहा कि किसान केवल फसल पैदा करने वाला न रहे, बल्कि उत्पादन से प्रसंस्करण और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन का हिस्सा बने। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर पैदा होंगे।
तालाब बन सकते हैं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत
बसंत चौधरी ने गांवों के तालाबों के वैज्ञानिक ढंग से जीर्णोद्धार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तालाबों को केवल सौंदर्यीकरण या जलभराव की समस्या तक सीमित नहीं रखना चाहिए। वर्षा जल संचयन, सिंचाई, मछली पालन और भूजल रिचार्ज से जोड़कर इन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गांव के तालाब, नहर, खेत, सड़क, बिजली और बाजार को एकीकृत योजना के तहत विकसित किया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षा और स्वास्थ्य है। गरीब परिवार की आय का बड़ा हिस्सा यदि बच्चों की पढ़ाई और इलाज में खर्च हो जाता है तो आर्थिक विकास का लाभ उस परिवार तक नहीं पहुंच सकता।
उन्होंने ब्लॉक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के साथ तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
युवाओं को स्थानीय स्तर पर मिले रोजगार
बसंत चौधरी ने कहा कि युवाओं को केवल सरकारी नौकरी के इंतजार में रखना व्यवस्था की बड़ी कमजोरी है। युवाओं को स्थानीय स्तर पर कौशल, तकनीक, पूंजी और बाजार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक ब्लॉक में रोजगार एवं उद्यमिता केंद्र विकसित किए जाएं, जहां युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ बैंकिंग, बाजार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सके।
गांव और ब्लॉक हों विकास का केंद्र
बसंत चौधरी ने कहा कि बड़े कार्यालय, महंगी गाड़ियां और आलीशान भवन विकास का प्रमाण नहीं हैं। वास्तविक विकास तब होगा जब किसान की खेती की लागत घटे, युवा को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले, बच्चों को बेहतर शिक्षा और मरीज को समय पर इलाज मिले।
उन्होंने कहा कि विकास की प्राथमिकताएं ऊपर से नीचे तय करने के बजाय नीचे से ऊपर तय होनी चाहिए। ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर पर क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के आधार पर बजट और योजनाएं निर्धारित की जाएं। इससे सरकारी योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई देंगी।
उन्होंने कहा कि देश को ऐसे विकास मॉडल की जरूरत है, जिसमें राजधानी और बड़े शहरों के बजाय गांव और ब्लॉक विकास के केंद्र बनें। जब किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा, युवा को स्थानीय रोजगार मिलेगा और परिवार को शिक्षा-स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, तभी देश में स्थायी और वास्तविक परिवर्तन दिखाई देगा।
बसंत चौधरी ने कहा कि राजनीतिक सत्ता बदलने से सरकार बदल सकती है, लेकिन व्यवस्था बदलने के लिए विकास की सोच, प्राथमिकताएं और काम करने का तरीका बदलना होगा। देश का वास्तविक परिवर्तन ऊपर से आदेश देने से नहीं, बल्कि नीचे के व्यक्ति को मजबूत करने से होगा।
Basti, Basti | Aug 10, 2026