हरदा में 'सॉइल सेनानी दिवस की घोषणा
-मृदा संरक्षण और प्राकृतिक खेती के जनअभियान को मिला नया संकल्प
-'सॉइल सेनानी एक जन अभियान पुस्तक का विमोचन
अनोखा तीर, हरदा। मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में हरदा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मिशन हैप्पी हरदा के अंतर्गत डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा एवं सत्यशिव फार्म, पानतलाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मां सरस्वती एवं भारत माता के पूजन के बाद कलेक्टर सिद्धार्थ जैन द्वारा 'सॉइल सेनानी दिवस की घोषणा की गई। कार्यक्रम में मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया। आयोजन में किसानों के साथ युवाओं और विद्यार्थियों को भी इस अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान मृदा को स्वस्थ रखने और कृषि को प्राकृतिक एवं टिकाऊ बनाने की आवश्यकता पर वक्ताओं ने विचार रखे।
'सॉइल सेनानी एक जन अभियान पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम में मृदा वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ तथा रमन क्षेत्रीय संसाधन केंद्र, हरदा के क्षेत्रीय प्रबंधक उमेश शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक 'सॉइल सेनानी एक जन अभियान का विमोचन किया गया। पुस्तक के माध्यम से मृदा संरक्षण और प्राकृतिक खेती के महत्व को जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक विमोचन के बाद स्वॉईल सैनानी एकेडमी ऑफ रिजनरेटिव एग्रीकल्चर की घोषणा भी की गई। इसका उद्देश्य पुनर्योजी कृषि, मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती से जुड़े ज्ञान एवं नवाचार को किसानों तथा युवाओं तक पहुंचाना है।
आठ सॉइल सेनानियों का सम्मान
कार्यक्रम में पिछले दो वर्षों से 'सॉइल सेनानी के रूप में मृदा संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कार्य कर रहे बेबी कायरा, पूजा टांक, उमेश शर्मा, मालव शाह, सत्यम, मनीष, दिलीप एवं गणेश को सम्मानित किया गया। सभी को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की गई।
रासायनिक खेती से प्रभावित हुई मृदा की गुणवत्ता : कलेक्टर
अपने उद्बोधन में कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कहा कि पिछले वर्षों में कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मृदा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। अब आवश्यकता है कि कृषि और विकास की दिशा तय करते समय गौ माता, धरती माता और पर्यावरण को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने प्राकृतिक खेती और मृदा संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए उपस्थित लोगों को सॉइल सेनानी की शपथ दिलाई तथा मृदा संरक्षण और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए बिना टिकाऊ कृषि और बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती।
हर परिवार को चाहिए 'फैमिली फार्मर भरत टांक
कार्यक्रम में भरत टांक ने 'फैमिली फार्मर की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रत्येक परिवार के लिए फैमिली डॉक्टर या फैमिली सलाहकार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार वर्तमान समय में 'फैमिली फार्मर की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फैमिली फार्मर की अवधारणा के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
हर गांव में तैयार हों जागरूक सॉइल सेनानी : राजीव बाहेती
मिशन हैप्पी हरदा के संस्थापक राजीव बाहेती ने कहा कि हरदा जिले के प्रत्येक गांव में जागरूक 'सॉइल सेनानी तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ये सॉइल सेनानी मृदा की उर्वरता और जैविक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने मृदा संरक्षण को केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए इसे व्यापक जनअभियान बनाने की आवश्यकता बताई।
'स्वस्थ मृदा ही स्वस्थ फसल और समृद्ध समाज का आधार
कार्यक्रम में उमेश शर्मा ने कहा कि, स्वस्थ मृदा ही स्वस्थ फसल, स्वस्थ किसान और समृद्ध समाज का आधार है। उन्होंने कहा कि मृदा संरक्षण केवल किसान की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 'सॉइल सेनानी दिवस की घोषणा के बाद हरदा जिले में युवाओं, विद्यार्थियों और किसानों को जोड़कर प्राकृतिक खेती एवं मृदा पुनर्जीवन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना होगा। कार्यक्रम में मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पुनर्योजी कृषि, पर्यावरण जागरूकता और सुरक्षित खाद्य उत्पादन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। 'सॉइल सेनानी दिवस की घोषणा को हरदा में मृदा संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती को जनअभियान का स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।