
बड़हिया में झूलों पर सियासत के बीच मृणाल माधव की नसीहत—‘आरोप नहीं, विकल्प तलाशें; परंपरा भी बचे, बच्चे भी सुरक्षित रहें’
बड़हिया। महावीर जी ठाकुरबाड़ी में झूला लगाने की अनुमति नहीं मिलने को लेकर बड़हिया में चल रही चर्चाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मृणाल माधव ने इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय व्यावहारिक समाधान तलाशने की अपील की है। वहीं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन से 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक महावीर जी ठाकुरबाड़ी परिसर में झूले लगाने की अनुमति मांगी गई थी। बताया जा रहा है कि अनुमति के लिए आवेदन इसी स्थल को लेकर किया गया था, जबकि किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर झूले लगाने की अनुमति की मांग नहीं की गई थी। जानकारी में यह बातें भी सामने आई है कि प्रशासनिक आदेश मिलने से पहले ही झूले लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
जगह की कमी और मुख्य सड़क पर यातायात का हवाला
मृणाल माधव ने कहा कि महावीर जी ठाकुरबाड़ी में पर्याप्त जगह का अभाव है और यह स्थल मुख्य सड़क के ठीक किनारे स्थित है। मोकामा से लखीसराय को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर लगातार भारी यातायात रहता है। ऐसे में झूलों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटने से सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खासकर छोटे बच्चों के भीड़ से निकलकर मुख्य सड़क तक पहुंचने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी अनहोनी के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रतीक्षा करनी चाहिए? उनके मुताबिक, मनोरंजन के साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
बड़े पोखर और कॉलेज घाट के पास विकल्प सुझाया
मृणाल माधव ने कहा कि महावीर जी ठाकुरबाड़ी में जगह की कमी के कारण अनुमति नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि झूले लगाने की संभावना समाप्त हो गई। इसके बजाय बड़े पोखर के आसपास, कॉलेज घाट के सामने स्थित खाली खेतों अथवा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर झूले लगाने की व्यवस्था की जा सकती थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे स्थल पर पर्याप्त खुली जगह, मुख्य सड़क से दूरी और बच्चों व परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुंजाइश हो सकती थी। उनके अनुसार, वैकल्पिक स्थल पर झूले लगाने के लिए जिला प्रशासन, बड़हिया प्रशासन और बड़हिया नगर परिषद के स्तर पर समन्वय कर समाधान तलाशा जा सकता था।
‘राजनीति नहीं, समाधान की जरूरत’
मृणाल माधव ने कहा कि किसी भी मामले में प्रशासन को दोषी ठहरा देना आसान है, लेकिन निर्णय के पीछे के कारणों को समझना और व्यावहारिक विकल्प तलाशना अधिक जरूरी है। प्रशासन से सवाल पूछना लोगों का अधिकार है, लेकिन हर निर्णय को उसके कारण समझे बिना विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की आलोचना करना या किसी पक्ष का समर्थन अथवा विरोध करना नहीं है। बड़हिया की परंपराएं कायम रहें, लोगों को मनोरंजन का अवसर मिले और सुरक्षा से समझौता न हो, यही प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर आपसी सहयोग और दूरदर्शिता के साथ समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि राजनीति से नहीं, समझदारी से समाधान निकलना चाहिए, ताकि परंपरा भी बचे, मनोरंजन भी हो और बच्चे सुरक्षित माहौल में मुस्कुराएं भी।