
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सूत्रों के मुताबिक, जहां पहले सामान्य दिनों में दानपेटियों से रोजाना ₹8 से ₹12 लाख तक का चढ़ावा निकलता था, वहीं अब पिछले कुछ दिनों से यह रकम घटकर ₹1 लाख से भी कम रह गई है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि श्रद्धालुओं की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। मंदिर में अभी भी ठीक ठाक संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंच रहे हैं, लेकिन दान देने के तरीके को लेकर लोगों की सोच बदलती दिख रही है।
कई श्रद्धालुओं का कहना है कि चढ़ावा चोरी के आरोपों से उन्हें दुख पहुंचा है। अब वे नकद दान के बजाय ऑनलाइन दान को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर में दान देने के साथ-साथ गरीबों, जरूरतमंदों और सेवा कार्यों में भी योगदान देना चाहिए।
वहीं संत समाज ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि रामभक्तों के मन में यह सवाल पैदा हुआ है कि भगवान को अर्पित किया गया दान सही जगह उपयोग हो रहा है या नहीं। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं:
2020 से 2024 के बीच विभिन्न माध्यमों से रोजाना औसतन करोड़ों रुपये का चंदा आता रहा।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद शुरुआती महीनों में दानपेटियों और अन्य माध्यमों से चढ़ावे में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भी दानपेटियों से रोजाना लाखों रुपये का चढ़ावा आता रहा।
लेकिन जून 2026 में विवाद सामने आने के बाद कई दिनों से दानपेटियों से निकलने वाली रकम ₹1 लाख से नीचे पहुंच गई है।
इस बीच ट्रस्ट ने दावा किया है कि अब दानपेटियों की गिनती, निगरानी और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया को और सख्त बना दिया गया है। दानपेटियां रोजाना दो बार खोली जा रही हैं और पूरे सिस्टम पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं हुई, तो चढ़ावा अचानक इतना क्यों घट गया?
क्या लोगों का भरोसा प्रभावित हुआ है, या फिर वे दान देने का तरीका बदल रहे हैं?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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