
संभावित सूखे की स्थिति में किसान अपनाएं जल संरक्षण एवं वैकल्पिक फसल प्रबंधन
डिंडौरी वर्ष 2026 के खरीफ मौसम में सामान्य से कम वर्षा एवं सूखे जैसी परिस्थितियों की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को समय रहते आवश्यक कृषि उपाय अपनाने की सलाह दी है। यह सलाह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर द्वारा जारी एल-नीनो प्रबंधन दिशा-निर्देशों के आधार पर दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे वर्षा जल संरक्षण को प्राथमिकता दें और खेत तालाब, चेक डैम, वर्षा जल संचयन संरचनाओं तथा मृदा नमी संरक्षण उपायों को अपनाएं। “खेत का पानी खेत में” और “गांव का पानी गांव में” अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विभाग के अनुसार यदि मानसून में विलंब हो तो किसान अल्पावधि एवं सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों का चयन करें। 2 से 4 सप्ताह की देरी होने पर बाजरा, रागी, मूंग, उड़द, लोबिया एवं तिल जैसी फसलें उपयुक्त रहेंगी। वहीं 4 सप्ताह से अधिक विलंब होने पर मोटे अनाज, दलहन एवं चारा फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
फसल स्थापित होने के बाद वर्षा रुकने की स्थिति में खेतों में नमी संरक्षण हेतु मल्चिंग, मिट्टी चढ़ाना, खरपतवार नियंत्रण तथा पोषक तत्वों के पर्णीय छिड़काव जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही जहां संभव हो, खेत तालाबों एवं सामुदायिक जलाशयों के माध्यम से जीवन रक्षक सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह नियमित रूप से प्राप्त करने, आकस्मिक फसल योजना अपनाने, संतुलित उर्वरक उपयोग करने तथा फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्रों एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय-समय पर मौसम पूर्वानुमान एवं कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
कृषि विभाग ने किसानों से बदलती मौसम परिस्थितियों के अनुसार वैज्ञानिक सलाह अपनाकर कृषि कार्य करने की अपील की है, ताकि संभावित सूखे के प्रभाव को कम करते हुए फसल उत्पादन सुरक्षित रखा जा सके।
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