जी, आज 13 अगस्त की अगस्त वीर गाथा वही रहेगी—सीवान के 13 वर्षीय बाल शहीद बच्चन प्रसाद और उनके साथियों की गाथा। उपलब्ध स्रोतों में 13 अगस्त 1942 को सीवान में तिरंगा फहराने के लिए निकले आंदोलन और बच्चन प्रसाद के घायल होने तथा बाद में 16 अगस्त को निधन का उल्लेख मिलता है।
🔥 आज की मुख्य हेडलाइन
“महज 13 साल की उम्र में तिरंगा लेकर निकला वीर—अंग्रेज़ों की गोलियों से भी नहीं डरा!”
🇮🇳 आज की गाथा
अगस्त वीर गाथा – 13 अगस्त
संवदिया न्यूज़ डेस्क की प्रस्तुति
आज की गाथा बिहार के सीवान के बाल स्वतंत्रता सेनानी बच्चन प्रसाद की है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की लहर जब सीवान पहुँची, तब महज 13 वर्ष के बच्चन प्रसाद भी अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ आंदोलन में उतर पड़े।
13 अगस्त 1942 को झगड़ू साह, बच्चन प्रसाद और छट्ठू गिरि के नेतृत्व में आंदोलनकारियों का जत्था सीवान के एसडीओ कार्यालय पर तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़ा। पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए गोली चलाई, जिसमें बच्चन प्रसाद सहित कई लोग घायल हुए। बाद में 16 अगस्त 1942 को बच्चन प्रसाद का निधन हो गया।
जिस उम्र में हाथों में किताबें होती हैं, उस उम्र में बच्चन प्रसाद ने तिरंगा थामकर आज़ादी की लड़ाई में अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
उनकी गाथा हमें याद दिलाती है कि भारत की आज़ादी केवल बड़े नेताओं के संघर्ष से नहीं मिली—बच्चों, युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम लोगों ने भी इसकी कीमत अपने बलिदान से चुकाई।
अमर बाल शहीद बच्चन प्रसाद, झगड़ू साह और छट्ठू गिरि सहित सभी ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को शत-शत नमन।
वंदे मातरम्। जय हिन्द। 🇮🇳
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