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संवदिया न्यूज SAMBADIYA NEWS

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🔴 मझुआ पश्चिम पंचायत में योजनाओं की जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन पर अंतरिम आदेश से किया इनकार, ECI और केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचन आयोग में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के तत्काल निलंबन की मांग भी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के तत्काल निलंबन का अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया और केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग तथा संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 

अखबार की रिपोर्ट के आधार पर आदेश देने से इनकार

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि केवल अखबारों या मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जा सकता। कोर्ट पहले निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब तथा रिकॉर्ड देखना चाहता है। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि CEC को निलंबित कर दिया जाता है तो निर्वाचन आयोग का कामकाज कौन संभालेगा और चुनावी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। अदालत ने संकेत दिया कि किसी भी अंतरिम आदेश से पहले संबंधित पक्षों को सुनना जरूरी है। 

14 फैसलों को लेकर विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की शुरुआत उन आरोपों से हुई जिनमें कहा गया कि SIR, मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन आयोग की तकनीकी व्यवस्था से जुड़े करीब 14 फैसलों पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज की थी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ये फैसले निर्वाचन आयोग के बहुसदस्यीय ढांचे के अनुरूप सर्वसम्मति या बहुमत की प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी न्यायालय के समक्ष जांच का विषय है। 

कोर्ट ने कानून के मुताबिक काम करने की उम्मीद जताई

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान को कानून के मुताबिक काम करना चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि किसी फैसले में जरूरी कानूनी प्रक्रिया या बहुमत का पालन नहीं हुआ, तो अदालत उस फैसले पर आगे कार्रवाई कर सकती है। 

Form-6 में बदलाव पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी उठा। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी संशोधित Form-6 को मंजूरी नहीं दी थी। इस मामले में भी अदालत रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर आगे विचार करेगी। 

अभी अंतिम फैसला नहीं

सुप्रीम कोर्ट द्वारा CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर अंतरिम राहत नहीं दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि याचिकाएं अंतिम रूप से खारिज हो गई हैं। कोर्ट ने केंद्र, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसके बाद मामले में आगे सुनवाई होगी और अदालत रिकॉर्ड के आधार पर यह तय कर सकती है कि आरोपों में कोई कानूनी उल्लंघन हुआ है या नहीं। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का रुख यही है कि पहले निर्वाचन आयोग और संबंधित पक्षों का पक्ष सुना जाए, उसके बाद ही मामले में आगे कोई आदेश दिया जाए।

संवदिया न्यूज – नई दिल्ली।

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Video 2
गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती पर मोहिनी देवी मेमोरियल स्कूल में श्रद्धांजलि सभा

संवदिया न्यूज (अररिया) – बिहार।

अररिया स्थित मोहिनी देवी मेमोरियल स्कूल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से GK Quiz Competition का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. पाराशर त्यागी, उपप्राचार्य मृणाल, प्रशासक अभिनंदन नौटियाल, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए विद्यालय के डायरेक्टर संजय प्रधान ने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सादगी के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से गांधीजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

वहीं, विद्यार्थियों को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे ‘जय जवान, जय किसान’ तथा देश के प्रति उनके योगदान के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चों में देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी संदेश से प्रेरणा लेते हुए अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को देश के महान व्यक्तित्वों के विचारों और आदर्शों से जोड़ने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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अररिया जिले की परमान (पनार) सहित अन्य नदियों में गंगीय डॉल्फिन की मौजूदगी जिले की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की महत्वपूर्ण पहचान बन रही है।
जिलाधिकारी विनोद दूहन ने कहा कि डॉल्फिन राष्ट्रीय जलीय जीव है और अररिया में इसकी संख्या में लगातार वृद्धि होना सुखद संकेत है। डॉल्फिन का संरक्षण सुनिश्चित होने पर अररिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है।
उन्होंने नदियों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने, डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करने और संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। अररिया को ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ में शामिल करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
संरक्षण के साथ जिले में इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
🪑 बंगला हाट में निशात फर्नीचर हाउस का फीता काटकर भव्य उद्घाटन
करांकिया। बंगला हाट, करांकिया में निशात फर्नीचर हाउस का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
मौके पर मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद हसनैन, सरपंच प्रतिनिधि मोहम्मद कासिम, मौलवी यासीन साहेब, वार्ड सदस्य अकमल हुसैन, डॉ० कौशर एवं मोईदुर रहमान समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
निशात फर्नीचर हाउस में सोफा सेट, डिजाइनर दीवान, डबल एवं सिंगल बेड, अलमारी, डाइनिंग टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सेंटर टेबल सहित लकड़ी एवं आयरन के विभिन्न आधुनिक फर्नीचर उपलब्ध हैं।
ग्राहकों की सुविधा के लिए आसान फाइनेंस/किस्त और होम डिलीवरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
प्रोप्राइटर मो० सुलेमान ने ग्राहकों से एक बार सेवा का अवसर देने की अपील की।
📍 पता: बंगला हाट, करांकिया
📞 संपर्क: 8445499129 | 9931234803
निशात फर्नीचर हाउस — बेहतरीन फर्नीचर, बेहतर सेवा।
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कटिहार में दिन दहाड़े वकील की हत्या। <nis:link nis:type=tag nis:id=katihar nis:value=katihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=crimenews nis:value=CrimeNews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=murder nis:value=murder nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=advocate nis:value=advocate nis:enabled=true nis:link/>
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🏏 मदनपुर में क्रिकेट का महाकुंभ! 7 दिसंबर से गूंजेगा MPL सीजन-1 का बिगुल, 20 नवंबर को मेगा ऑक्शन।
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रानीगंज नगर पंचायत की ओर से हुआ स्वकच्छता मैराथन 2026 सम्पन्न।
700 से अधिक लोगों ने लिया भाग। <nis:link nis:type=tag nis:id=रानीगंज nis:value=रानीगंज nis:enabled=true nis:link/>
गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती पर मोहिनी देवी मेमोरियल स्कूल में श्रद्धांजलि सभा

संवदिया न्यूज (अररिया) – बिहार।

अररिया स्थित मोहिनी देवी मेमोरियल स्कूल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से GK Quiz Competition का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. पाराशर त्यागी, उपप्राचार्य मृणाल, प्रशासक अभिनंदन नौटियाल, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए विद्यालय के डायरेक्टर संजय प्रधान ने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सादगी के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से गांधीजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

वहीं, विद्यार्थियों को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे ‘जय जवान, जय किसान’ तथा देश के प्रति उनके योगदान के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चों में देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी संदेश से प्रेरणा लेते हुए अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को देश के महान व्यक्तित्वों के विचारों और आदर्शों से जोड़ने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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Video 12
शराब भरी ट्रक को पब्लिक ने लूटा । वीडियो हो रहा है जमनकर वायरल।
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शराब को लूटते पब्लिक।<nis:link nis:type=tag nis:id=शराब nis:value=शराब nis:enabled=true nis:link/>
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जिसने लाठी नहीं, सत्य को हथियार बनाया: मोहनदास से ‘महात्मा’ और राष्ट्रपिता तक की कहानी
2 अक्टूबर विशेष | महात्मा गांधी जयंती।
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तिरहुत स्नातक सीट से वंशीधर ब्रजवासी ने भरा नामांकन | समर्थकों के साथ पहुंचे मुजफ्फरपुर | MLC Election 2026
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जिसने लाठी नहीं, सत्य को हथियार बनाया: मोहनदास से ‘महात्मा’ और फिर राष्ट्रपिता तक की कहानी

संवदिया न्यूज – विशेष लेख

2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मा एक दुबला-पतला बालक आगे चलकर ऐसा नाम बना, जिसने भारत की आजादी की लड़ाई को दुनिया के सामने एक अलग रास्ता दिखाया। नाम था मोहनदास करमचंद गांधी।

जिस व्यक्ति ने कभी दक्षिण अफ्रीका की ट्रेन से अपमानित होकर बाहर निकाले जाने का दर्द सहा था, उसी ने आगे चलकर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी—हथियारों से नहीं, सत्य और अहिंसा से।

लेकिन गांधी बनने की यह कहानी एक दिन में नहीं बनी। इसके पीछे बचपन के संस्कार, विदेश की पढ़ाई, दक्षिण अफ्रीका का संघर्ष, किसानों का दर्द, जेल की यातनाएं, देशव्यापी आंदोलन और अंततः देश की आजादी तक का लंबा सफर था।

पोरबंदर से शुरू हुई कहानी

2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ। पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं।

मां के संस्कारों का मोहनदास के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। सत्य, संयम, उपवास और धार्मिक सहिष्णुता उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनने लगे।

लगभग 13 वर्ष की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा मकनजी से हुआ। आगे चलकर कस्तूरबा गांधी उनके संघर्षों की महत्वपूर्ण साथी बनीं।

बैरिस्टर बनने का सपना

1888 में गांधी जी कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लंदन में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटे।

वकालत शुरू की, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली।

फिर आया 1893, जिसने मोहनदास की पूरी जिंदगी बदल दी।

दक्षिण अफ्रीका की ट्रेन से निकले गांधी

एक कानूनी मामले के सिलसिले में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। वहां भारतीयों के साथ नस्लीय भेदभाव देखकर वे विचलित हुए।

7 जून 1893 को पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें ट्रेन के डिब्बे से बाहर निकाल दिया गया।

यह अपमान उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बना।

उन्होंने तय किया कि अन्याय के खिलाफ लड़ना होगा।

लेकिन सवाल था—कैसे?

यहीं से जन्म हुआ सत्याग्रह का।

गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय को संगठित किया और अन्याय के खिलाफ अहिंसक संघर्ष का प्रयोग किया। यही प्रयोग आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का बड़ा हथियार बना।

1915 में भारत लौटे तो देश ने नया गांधी देखा

करीब दो दशक दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष करने के बाद 9 जनवरी 1915 को गांधी जी भारत लौटे।

भारत आने के बाद उन्होंने देश को समझने के लिए यात्राएं कीं। किसानों, मजदूरों और आम लोगों की परेशानियों को करीब से देखा।

और फिर बिहार ने गांधी जी के भारतीय राजनीतिक जीवन को नई पहचान दी।

चंपारण ने मोहनदास को जननेता बना दिया

1917 में चंपारण सत्याग्रह हुआ।

नील की खेती से परेशान किसानों की समस्याओं को लेकर गांधी जी चंपारण पहुंचे। किसानों की शिकायतें सुनीं और उनके पक्ष को सामने रखा।

चंपारण आंदोलन ने गांधी जी को आम भारतीयों के बीच एक बड़े जननेता के रूप में स्थापित किया।

इसके बाद 1918 में खेड़ा सत्याग्रह और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन ने किसानों और मजदूरों के साथ उनका रिश्ता और मजबूत किया।

‘मोहनदास’ से ‘महात्मा’ बनने की कहानी

गांधी जी को बाद में ‘महात्मा’ के नाम से जाना गया।

‘महात्मा’ का अर्थ है—महान आत्मा।

रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा गांधी जी के लिए ‘महात्मा’ संबोधन का प्रयोग प्रसिद्ध हुआ। हालांकि इस संबोधन के शुरुआती प्रयोग को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत मिलते हैं।

एक साधारण बैरिस्टर अब जनता की नजर में महात्मा बन चुका था।

जलियांवाला बाग ने देश को झकझोर दिया

1919 में रॉलेट एक्ट के विरोध के बीच 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ।

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।

गांधी जी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को और व्यापक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

असहयोग आंदोलन: अंग्रेजी सत्ता को सहयोग देना बंद करो

1920 में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ।

विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी संस्थाओं से दूरी और स्वदेशी को बढ़ावा इसके प्रमुख हिस्से थे।

लेकिन 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया।

क्यों?

क्योंकि उनके लिए आजादी से भी महत्वपूर्ण था अहिंसा का सिद्धांत।

नमक की एक मुट्ठी ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी

1930 में गांधी जी ने नमक कानून के खिलाफ आंदोलन छेड़ा।

12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू हुआ।

लगभग 24 दिनों की यात्रा के बाद 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा।

एक मुट्ठी नमक देशभर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गया।

यही था गांधी का तरीका—बड़ी सत्ता को चुनौती देने के लिए आम आदमी के जीवन से जुड़ा मुद्दा चुनना।

लंदन की मेज से भारत के गांव तक

1931 में गांधी जी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल होने लंदन गए।

उन्होंने भारत के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा की। हालांकि तत्काल कोई समाधान नहीं निकला।

भारत लौटकर वे फिर जनता के बीच पहुंच गए।

गांधी जी का मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। इसलिए खादी, ग्राम स्वराज, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुधार उनके कार्यक्रमों का हिस्सा बने।

अस्पृश्यता के खिलाफ भी लड़ाई

गांधी जी की लड़ाई केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं थी।

उन्होंने अस्पृश्यता और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाया। हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया।

उनके विचारों और तरीकों को लेकर बाद में कई गंभीर बहसें भी हुईं, लेकिन सामाजिक सुधार उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

कितने आंदोलन किए गांधी ने?

गांधी जी के आंदोलनों की कोई एक आधिकारिक संख्या नहीं है। छोटे-बड़े सत्याग्रहों को गिनने के तरीके अलग-अलग हैं।

भारत के प्रमुख आंदोलनों में—

1917 — चंपारण सत्याग्रह

1918 — अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन

1918 — खेड़ा सत्याग्रह

1919 — रॉलेट सत्याग्रह

1920–22 — असहयोग आंदोलन

1930–34 — सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक सत्याग्रह

1940–41 — व्यक्तिगत सत्याग्रह

1942 — भारत छोड़ो आंदोलन

शामिल रहे।

इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका में भी गांधी जी ने कई सत्याग्रहों का नेतृत्व किया था।

‘करो या मरो’—भारत छोड़ो आंदोलन

8 अगस्त 1942 को बंबई में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ।

गांधी जी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने का आह्वान करते हुए कहा—

“करो या मरो।”

अगले ही दिन गांधी जी सहित कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

गांधी जी को पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद रखा गया।

यहीं 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा गांधी का निधन हुआ।

15 अगस्त 1947: भारत आजाद हुआ, लेकिन गांधी कहां थे?

लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।

देश में जश्न था, लेकिन गांधी जी दिल्ली में जश्न नहीं मना रहे थे।

देश के विभाजन और सांप्रदायिक हिंसा ने उन्हें गहराई से व्यथित किया था।

वे नोआखाली, बिहार और कलकत्ता सहित हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयास में लगे रहे।

उनका संदेश था—आजादी तभी सार्थक है, जब इंसान इंसान का दुश्मन न बने।

‘राष्ट्रपिता’ कब घोषित हुए?

यह सवाल आज भी बहुत पूछा जाता है।

गांधी जी को देश में व्यापक रूप से ‘राष्ट्रपिता’ कहा जाता है। लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत सरकार ने उन्हें किसी औपचारिक सरकारी अधिसूचना या संविधान के प्रावधान के जरिए ‘राष्ट्रपिता’ घोषित नहीं किया।

इसलिए इसकी कोई आधिकारिक “घोषणा की तारीख” नहीं है।

‘राष्ट्रपिता’ गांधी जी के लिए प्रचलित सम्मानसूचक संबोधन है।

भारत सरकार के आधिकारिक सामग्री में भी गांधी जी को “Father of our Nation” के रूप में संदर्भित किया गया है। 

30 जनवरी 1948: गोलियों ने रोक दी गांधी की यात्रा

30 जनवरी 1948 की शाम।

नई दिल्ली का बिड़ला भवन।

गांधी जी प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे।

इसी दौरान नाथूराम गोडसे ने उन पर गोली चला दी।

गांधी जी की उसी दिन मृत्यु हो गई।

उम्र थी 78 वर्ष।

एक व्यक्ति की जिंदगी समाप्त हो गई, लेकिन उसके विचारों पर दुनिया में बहस और चर्चा जारी रही।

गांधी की सबसे बड़ी विरासत क्या है?

गांधी जी के जीवन से जुड़े प्रमुख विचार थे—

सत्य।
अहिंसा।
सत्याग्रह।
स्वदेशी।
स्वच्छता।
ग्राम स्वराज।
सामाजिक सद्भाव।
आत्मनिर्भरता।

उनकी हर बात से हर व्यक्ति सहमत हो, यह जरूरी नहीं। उनके राजनीतिक और सामाजिक विचारों पर आज भी बहस होती है।

लेकिन यह ऐतिहासिक तथ्य है कि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में आम जनता की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

और आखिर में—भारत उनके ऋण से कैसे मुक्त होगा?

भारत की आजादी किसी एक व्यक्ति की देन नहीं थी।

भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सरोजिनी नायडू और असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने-अपने तरीके से देश की आजादी के संघर्ष में योगदान दिया।

लेकिन गांधी जी ने सत्याग्रह और अहिंसा को जनआंदोलन का माध्यम बनाकर स्वतंत्रता की लड़ाई को गांव-गांव और आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चंपारण से दांडी तक, असहयोग से भारत छोड़ो तक—गांधी की यात्रा भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या हो गई, लेकिन उनका जीवन भारतीय इतिहास का हिस्सा बन गया।

आज 2 अक्टूबर को उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाना आसान है।

मुश्किल है उनके बताए सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सद्भाव और मानवता को अपने जीवन में उतारना।

भारत अपने सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का ऋणी है। गांधी जी भी उस महान विरासत के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।

उनके विचारों से सहमत हों या असहमत—इतिहास में उनके योगदान को समझना और याद रखना जरूरी है।

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी को विनम्र श्रद्धांजलि।

सत्य की राह कठिन हो सकती है, लेकिन गांधी की कहानी यही बताती है कि एक व्यक्ति का विचार भी करोड़ों लोगों को एक आंदोलन से जोड़ सकता है।
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रानीगंज में 100 ग्राम स्मैक के साथ बाइक सवार युवक गिरफ्तार

संवदिया न्यूज, अररिया।

रानीगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 100 ग्राम स्मैक के साथ बाइक सवार एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से स्मैक के अलावा एक बाइक भी जब्त की है। गिरफ्तार युवक की पहचान रानीगंज थाना क्षेत्र के कालाबलुवा वार्ड संख्या-10 निवासी शिवम कुमार (22) के रूप में हुई है।

अररिया एसडीपीओ सुशील कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि 30 सितंबर 2026 को रानीगंज पुलिस को सूचना मिली थी कि कालाबलुवा की ओर से एक व्यक्ति बाइक से स्मैक लेकर रानीगंज की तरफ बिक्री के लिए आ रहा है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने बड़हरा मुख्य मार्ग पर वाहन जांच शुरू की।

वाहन जांच के दौरान पुलिस को एक बाइक आती दिखाई दी। पुलिस ने बाइक को रोककर उसकी जांच की। तलाशी के दौरान बाइक सवार शिवम कुमार के पास से 100 ग्राम स्मैक बरामद होने की बात पुलिस ने कही। इसके बाद पुलिस ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया और बाइक जब्त कर ली।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस मामले में रानीगंज थाना कांड संख्या 334/2026, दिनांक 30 सितंबर 2026, के तहत धारा 8(c)/21(b) NDPS Act में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

पहले से भी दर्ज है मामला

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार शिवम कुमार का पूर्व आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ रानीगंज थाना में कांड संख्या 576/2024, दिनांक 26 दिसंबर 2024, दर्ज है। यह मामला बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 30(a) से संबंधित है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में 29 जुलाई 2025 को आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।

कार्रवाई में ये पुलिसकर्मी रहे शामिल

कार्रवाई में रानीगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक अजय कुमार पासवान, पुलिस अवर निरीक्षक राकेश कुमार, चालक सिपाही अमरेश कुमार तथा सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे।

पुलिस ने बरामद स्मैक और बाइक को जब्त कर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

नोट: गिरफ्तारी, बरामदगी और पूर्व आपराधिक मामले से संबंधित विवरण पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर हैं। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से वंशीधर ब्रजवासी ने दाखिल किया नामांकन, समर्थकों के साथ पहुंचे आयुक्त कार्यालय

मुजफ्फरपुर – बिहार।

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव के लिए वर्तमान विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया। वे अपने समर्थकों और साथियों के साथ मुजफ्फरपुर स्थित तिरहुत प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्र जमा किया। 

नामांकन से पहले ब्रजवासी की ओर से समर्थकों के साथ नामांकन सह आशीर्वाद यात्रा का आयोजन किया गया। तस्वीर में जारी आमंत्रण के अनुसार कार्यक्रम में मतदाताओं, अभिभावकों, छात्रों, नौजवानों, शिक्षित बेरोजगारों, संविदा कर्मियों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और समर्थकों से शामिल होकर आशीर्वाद देने की अपील की गई थी।

ब्रजवासी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश की है। बिहार विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विधान पार्षद के रूप में दर्ज किया गया है। 

बता दें कि वर्ष 2024 के तिरहुत स्नातक उपचुनाव में भी वंशीधर ब्रजवासी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे। 

नामांकन के दौरान समर्थकों की मौजूदगी और चुनावी गतिविधियों के बीच तिरहुत स्नातक सीट पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी दिनों में अन्य प्रत्याशियों के नामांकन के बाद चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। 

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AI की दुनिया को जानिए और सिख कर अपने रोज के कामों को आसान कीजिए ।
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पीएम आवास योजना में गड़बड़ी का आरोप, पक्के मकान वालों को आवास और जरूरतमंद वंचित

प्रणय राज व्यूरो रिपोर्ट, संवदिया न्यूज (नालंदा) – बिहार।

हरनौत। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए पंचायत स्तर पर ग्राम सभा और सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सरथा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि पात्रता के मानकों की अनदेखी कर कुछ ऐसे लोगों के नाम लाभुक सूची में शामिल किए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, जबकि कई जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, पीएम आवास योजना के लिए कुल 1,650 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 482 लाभुकों का चयन किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में आवास सहायक की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि सूची में कुछ ऐसे परिवारों के नाम भी शामिल हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान है। कुछ नामों को लेकर सरकारी नौकरी करने वाले परिवार के सदस्यों का भी हवाला दिया गया है।

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि कई गरीब परिवार आज भी झुग्गी-झोपड़ी या जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले ऐसे लोगों का नाम लाभुक सूची में नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्राम सभा में हंगामा

पीएम आवास योजना की सूची को लेकर आयोजित ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने विरोध जताया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया को कुछ समय के लिए बंधक बना लिया। हंगामे के कारण ग्राम सभा को स्थगित करना पड़ा। बताया गया कि मुखिया के समझाने के बाद स्थिति शांत हुई।

डीएम कार्यालय पहुंचकर की दोबारा जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि योजना में कथित अनियमितता को लेकर इससे पहले भी प्रखंड कार्यालय का घेराव किया गया था। इस दौरान ज्ञापन सौंपकर लाभुक सूची की जांच और पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की गई थी।

इसके बाद पंचायत के दर्जनों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी उदिता सिंह से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी। ग्रामीणों ने लाभुकों की सूची की दोबारा जांच कराने तथा वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की।

ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी ने उनकी समस्याओं को सुना और मामले की जांच कर जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

पीएम आवास योजना में कथित अनियमितता और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की आधिकारिक जांच या पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
पीएम आवास योजना में गड़बड़ी का आरोप, पक्के मकान वालों को आवास और जरूरतमंद वंचित

प्रणय राज व्यूरो रिपोर्ट, संवदिया न्यूज (नालंदा) – बिहार।

हरनौत। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए पंचायत स्तर पर ग्राम सभा और सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सरथा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि पात्रता के मानकों की अनदेखी कर कुछ ऐसे लोगों के नाम लाभुक सूची में शामिल किए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, जबकि कई जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, पीएम आवास योजना के लिए कुल 1,650 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 482 लाभुकों का चयन किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में आवास सहायक की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि सूची में कुछ ऐसे परिवारों के नाम भी शामिल हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान है। कुछ नामों को लेकर सरकारी नौकरी करने वाले परिवार के सदस्यों का भी हवाला दिया गया है।

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि कई गरीब परिवार आज भी झुग्गी-झोपड़ी या जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले ऐसे लोगों का नाम लाभुक सूची में नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्राम सभा में हंगामा

पीएम आवास योजना की सूची को लेकर आयोजित ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने विरोध जताया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया को कुछ समय के लिए बंधक बना लिया। हंगामे के कारण ग्राम सभा को स्थगित करना पड़ा। बताया गया कि मुखिया के समझाने के बाद स्थिति शांत हुई।

डीएम कार्यालय पहुंचकर की दोबारा जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि योजना में कथित अनियमितता को लेकर इससे पहले भी प्रखंड कार्यालय का घेराव किया गया था। इस दौरान ज्ञापन सौंपकर लाभुक सूची की जांच और पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की गई थी।

इसके बाद पंचायत के दर्जनों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी उदिता सिंह से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी। ग्रामीणों ने लाभुकों की सूची की दोबारा जांच कराने तथा वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की।

ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी ने उनकी समस्याओं को सुना और मामले की जांच कर जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

पीएम आवास योजना में कथित अनियमितता और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की आधिकारिक जांच या पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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