
उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत भुगतान में गड़बड़ी किए जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच में सामने आया है कि जिस मरीज को वॉर्ड में भर्ती करके आसानी से इलाज किया जा सकता था, उसे भी कई दिनों तक आईसीयू में भर्ती दिखाकर तीन गुना बिल बना दिया गया। आयुष्मान योजना के तहत आए मरीजों के इलाज में निजी अस्पतालों ने एक दो नहीं बल्कि कई मरीजों के साथ ऐसा किया गया। योजना की नोडल स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ ऐंड इंटीग्रेटेड सर्विसवेज (साचीज) ने निजी अस्पतालों की तरफ से भुगतान के दावों में इस गड़बड़ी को पकड़ा। इसके बाद ऐसे करीब 300 अस्पतालों का भुगतान तुरंत रोक दिया गया।
साचीज की ओर से गड़बड़ी जाने के बाद इन अस्पतालों का फील्ड ऑडिट करवाने का फैसला किया गया। वहीं, योजना के तय मानक पूरा न करने वाले 200 अस्पतालों को योजना से बाहर (डी-इंपैनल) कर दिया गया है। साचीज सूत्रों की माने तो अस्पतालों की तरफ से इलाज के बाद मरीजों के भुगतान के बिल और इलाज से जुड़े दस्तावेज लगाकर भुगतान का दावा भेजा जाता है। जनवरी से अस्पतालों के भुगतान से पहले उसकी जांच में काफी सख्ती की गई।
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