
चमत्कार या आस्था से खिलवाड़? | SA News Chhattisgarh
उत्तर प्रदेश | 27-09-2026: क्या कोई चमत्कारी पर्चा किसी के जीवन का फैसला बदल सकता है? बागेश्वर धाम के दावों और धार्मिक मान्यताओं पर उठे सवालों ने एक बार फिर अंधविश्वास बनाम शास्त्र-सम्मत भक्ति की बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश के मऊरानीपुर निवासी राजेंद्र श्रीवास का दावा है कि मई 2024 में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक पर्चे में उनकी पत्नी को प्रेतबाधा और परिवार में ‘पुत्र योग’ लिखा था। तीन बेटियों के पिता राजेंद्र ने पर्चे पर विश्वास कर संतान की योजना बनाई, लेकिन 11 जून 2026 को उनके घर चौथी बेटी का जन्म हुआ। लगभग तीन महीने बाद जब दंपती स्पष्टीकरण मांगने बागेश्वर धाम पहुंचे, तो राजेंद्र के अनुसार पर्चा देखकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा - "गलती है ये", और सेवकों ने उन्हें वहां से हटा दिया। राजेंद्र का कहना है कि वे ईश्वर विरोधी नहीं, और न ही अपनी बेटी से कोई शिकायत है, बल्कि अंधविश्वास के विरुद्ध जागरूकता चाहते हैं।
इसी बीच, धीरेंद्र शास्त्री के उस विचार पर भी सवाल उठ रहे हैं जिसमें वे शिव और विष्णु को एक तथा अविनाशी बताते हैं। शास्त्रों के प्रमाण इसके विपरीत हैं। श्रीमद्देवीभागवत गीता प्रेस गोरखपुर, संपादक: हनुमान प्रसाद पोद्दार, चिमनलाल गोस्वामी, तीसरा स्कंध, पृष्ठ 123 में विष्णु जी देवी दुर्गा से कहते हैं कि मैं, ब्रह्मा और शंकर आपकी कृपा से विद्यमान हैं। हमारा आविर्भाव (जन्म) और तिरोभाव (मृत्यु) होता है, केवल आप नित्य हैं। दूसरी ओर, धाम में प्रचलित 'ॐ बागेश्वराय नमः' मंत्र का वेदों व पुराणों में प्रावधान नहीं है। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17, श्लोक 23 में लिखा है-
ॐ, तत्, सत्, इति, निर्देशः, ब्रह्मणः, त्रिविधः, स्मृतः।
ब्राह्मणाः, तेन, वेदाः, च, यज्ञाः, च, विहिताः, पुरा॥
इसके अनुसार पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति केवल 'ॐ तत् सत्' के जाप से ही संभव है। इसमें 'ॐ' सार्वजनिक है, जबकि 'तत्' और 'सत्' सांकेतिक हैं, जिन्हें केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं। बिना सतगुरु के किसी भी मनमुखी मंत्र का जाप शास्त्र-विरुद्ध साधना माना गया है। #MauRanipur #Awareness #DhirendraShastri #SANewsChhattisgarh #viral