
रीवा के वृद्धाश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब न्यायाधीश ने माता-पिता और बुजुर्गों को लेकर ऐसी बात कही, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। आखिर क्यों आज उन माता-पिता से बच्चों की दूरियां बढ़ती जा रही हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दी?
रीवा के वृद्धाश्रम में आयोजित कार्यक्रम में बुजुर्गों के बीच पहुंचीं न्यायाधीश ने माता-पिता के सम्मान और परिवार में बुजुर्गों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बात कही।
उन्होंने कहा कि माता-पिता सिर्फ परिवार के सदस्य नहीं होते, बल्कि वह हमारी जिंदगी की वह नींव हैं, जिस पर हमारा पूरा जीवन खड़ा होता है। लेकिन बदलते समय के साथ कई परिवारों में बुजुर्गों और बच्चों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं।
कभी जिन माता-पिता ने अपनी खुशियों का त्याग कर बच्चों की हर जरूरत पूरी की, वही माता-पिता आज वृद्धाश्रम की चौखट तक पहुंचने को मजबूर क्यों हो रहे हैं?
कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश की बातें सुनकर वहां मौजूद कई बुजुर्ग भावुक नजर आए। संदेश साफ था—बुजुर्गों को केवल सहारे की नहीं, बल्कि सम्मान, अपनापन और अपनेपन की जरूरत होती है।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि वृद्धाश्रम क्यों बढ़ रहे हैं...
सवाल यह भी है कि क्या हम अपने ही घरों में माता-पिता के लिए वह जगह और सम्मान दे पा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं?
क्योंकि माता-पिता की उम्र बढ़ती है, जरूरतें बदलती हैं, लेकिन उनके प्रति हमारी जिम्मेदारी कभी खत्म नहीं होती।
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