
धरियावद ठिकाना की तीनों बेटियों ने थामा कांग्रेस का 'हाथ'; राजश्री राणावत एवं चंद्रिका राणावत बोलीं- "पद नहीं, जनता का प्यार ही हमारी सबसे बड़ी विरासत एवं हमारा उद्देश्य प्रतापगढ़ जिले के हर गाँव, ढाणी और घर-घर तक पहुँचना है। क्षेत्र की महिलाओं, युवाओं और आमजन की बात सुनकर उनकी समस्याओं और सुझावों को उचित मंच तक पहुँचाना तथा धारियावद के विकास और प्रगति में अपना योगदान देना हमारी प्राथमिकता रहेगी।"
धरियावद क्षेत्र की राजनीति में उस वक्त बड़ा और भावनात्मक मोड़ आया, जब ठिकाना धरियावद के भानु प्रताप सिंह राणावत की तीनों सुपुत्रियों राज श्री राणावत, चंद्रिका राणावत और दिव्या राणावत ने एक साथ औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
पिता की सीख याद कर हुईं भावुकः
स्वागत समारोह में कांग्रेस का दुपट्टा धारण कर चंद्रिका राणावत ने मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अपने पिता (दाता/बापजी) के वचनों को याद करते हुए उन्होंने कहा:
"दाता ने सिखाया था कि धरियावद के लोग हमारा परिवार हैं। पद मिले न मिले, जनता का प्यार और सम्मान ही हमारी सबसे बड़ी दौलत है। हम किसी पद के लिए नहीं, निस्वार्थ सेवा के लिए आए हैं।"
युवाओं और मातृशक्ति को जोड़ने का संकल्पः उन्होंने जोर देकर कहा कि आज युवाओं और महिलाओं को आगे लाना बेहद जरूरी है। तीनों बहनें ज़मीनी स्तर पर जनता और कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं।
सियासी हलचल तेजः
राजघराने की तीनों बेटियों के एक साथ सक्रिय राजनीति में उतरने से क्षेत्र के सियासी गलियारों में भारी उत्साह है। इसे स्थानीय स्तर पर युवाओं और महिलाओं को कांग्रेस से जोड़ने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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