
धरियावद में कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ बने भानु प्रताप सिंह: सीट आरक्षित, फिर भी सियासत की धुरी
धरियावद (प्रतापगढ़)।
मेवाड़-वागड़ के सीमावर्ती धरियावद विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह राणावत की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता खासी चर्चा में है। धरियावद विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित होने के बावजूद सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखने वाले भानु प्रताप सिंह क्षेत्र की राजनीति में हाशिए पर जाने के बजाय कांग्रेस संगठन की मुख्य धुरी बने हुए हैं।
हाल ही में धरियावद नगर पालिका चुनाव में उनकी रणनीतिक सूझबूझ खुलकर सामने आई। 20 वार्डों वाले पालिका बोर्ड में जब कांग्रेस और भाजपा 10-10 पार्षदों की बराबरी पर आ खड़े हुए, तब अपने खेमे को एकजुट रखने, रणनीति तैयार करने और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर मुखर होकर कांग्रेस का पक्ष रखने की पूरी कमान उन्होंने ही संभाली।
वर्तमान में क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और भाजपा की घेराबंदी के बीच वे कांग्रेस के लिए 'ब्रिज बिल्डर' की भूमिका निभा रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य ग्रामीण अंचल और कस्बाई सामान्य वर्ग के बीच समन्वय साधते हुए उन्होंने पूर्व विधायक नगराज मीणा के साथ मिलकर BAP में गए सैकड़ों कार्यकर्ताओं की कांग्रेस में घर वापसी कराई है, जिससे पार्टी को जमीनी मजबूती मिली।
सीट आरक्षण के चलते स्वयं सीधे विधानसभा चुनाव न लड़ पाने की सीमा के बावजूद उन्होंने अपनी अगली पीढ़ी को राजनीति में उतारकर स्थानीय निकाय और पंचायती राज स्तर पर प्रभाव कायम रखा है। इसके साथ ही क्षेत्र के धार्मिक आयोजनों, भागवत कथाओं और सर्वसमाज के सामाजिक मंचों पर उनकी नियमित उपस्थिति सीधे जनता से उनका जीवंत संवाद बनाए रखती है।
धरियावद में आगामी सियासी चुनौतियों के बीच भानु प्रताप सिंह की यह निरंतर सक्रियता साबित करती है कि वे टिकट की दौड़ से बाहर रहकर भी संगठन के सबसे मजबूत 'किंगमेकर' और संकटमोचक बने हुए हैं। #Congress #Pratapgarh #Dhariawad #mewar #wagad