
गोपालपुर हादसा: बिड़ला प्रोजेक्ट और वन परिक्षेत्र बुढ़ार की सांठगांठ का पर्दाफाश! केशव प्रसाद साहू की मौत का हर्जाना कौन देगा?
गोपालपुर। बिड़ला माइंस प्रोजेक्ट में पेड़ कटाई के दौरान शाहपुर निवासी मजदूर केशव प्रसाद साहू की दर्दनाक मौत के मामले में अब वन परिक्षेत्र बुढ़ार के अधिकारियों और बिड़ला प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि बुढ़ार रेंज के डिप्टी रेंजर और संबंधित बीट गार्ड की लापरवाही व मौन सहमति के चलते ही नियमों को ताक पर रखकर यह जानलेवा खेल खेला जा रहा था।
वन परिक्षेत्र बुढ़ार के अधिकारियों की घोर लापरवाही
नियमों के अनुसार वन भूमि पर कटाई का कार्य वन परिक्षेत्र बुढ़ार के जिम्मेदार अधिकारियों की सीधी निगरानी में होना चाहिए। लेकिन कार्यस्थल पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम थे और न ही मौके पर वन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद था।
बीट गार्ड की गायब मौजूदगी: बीट गार्ड की प्राथमिक जिम्मेदारी कटाई के दौरान सुरक्षा घेरा बनवाने और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है, लेकिन बीट गार्ड ने अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया।
डिप्टी रेंजर का ढुलमुल रवैया: बुढ़ार रेंज के डिप्टी रेंजर की शह पर बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशिक्षण के काम जारी था। आखिर डिप्टी रेंजर ने कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की जांच किए बिना कटाई की अनुमति कैसे रहने दी?
बाहरी लोगों से काम और केशव प्रसाद साहू की बलि
बिड़ला प्रोजेक्ट के ठेकेदार और बुढ़ार वन परिक्षेत्र के कर्मचारियों की मिलीभगत से बाहरी लोगों और मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे काम में झोंका जा रहा है। शाहपुर निवासी केशव प्रसाद साहू इसी सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ गए। सुरक्षा हेलमेट, चेतावनी बोर्ड और आपातकालीन चिकित्सा जैसी बेसिक सुविधाएं तक गायब थीं।
बड़ा सवाल: केशव प्रसाद साहू के परिवार को हर्जाना कौन देगा?
एक गरीब मजदूर की मौत के बाद अब वन विभाग और बिड़ला माइंस प्रबंधन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या वन परिक्षेत्र बुढ़ार के डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड पर विभागीय कार्रवाई और मामला दर्ज होगा?
क्या बिड़ला माइंस प्रबंधन मृतक केशव प्रसाद साहू के पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और जीवन-यापन का सहारा देगा?
ग्रामीणों का आक्रोश, कड़े आंदोलन की चेतावनी
शाहपुर और गोपालपुर के ग्रामीणों में बुढ़ार वन विभाग और बिड़ला प्रबंधन के खिलाफ भारी गुस्सा है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषी डिप्टी रेंजर, बीट गार्ड और बिड़ला प्रोजेक्ट के ठेकेदार पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं होता और पीड़ित परिवार को हर्जाना नहीं मिलता, तब तक उग्र आंदोलन जारी रहेगा।