कहानी बदलाव की
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शहडोल के जंगलों में पाई जाने वाली वन तुलसी की बढ़ी मांग, ग्रामीणों के लिए आय का नया अवसर
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शहडोल जिले के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली वन तुलसी की बाजार में मांग बढ़ रही है। औषधीय उपयोग के कारण वन तुलसी की पत्तियों की मांग विभिन्न बाजारों एवं औषधि से संबंधित संस्थानों में बनी हुई है। वन क्षेत्र से लगे ग्रामीण अंचलों के लोगों के लिए वन तुलसी का संग्रहण एवं उपलब्धता आय के अतिरिक्त अवसर के रूप में सामने आ रही है। वन तुलसी को सामान्य तुलसी से अलग माना जाता है। इसके पौधे अपेक्षाकृत बड़े, पत्तियां आकार में बड़ी तथा सुगंध अधिक तीव्र होती है। जिले के वन क्षेत्रों में यह प्राकृतिक रूप से पाई जाती है।
70 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक खरीदी जा रही पत्तियां
औषधीय महत्व की वन उपज का व्यापार करने वाले शहडोल निवासी श्री प्रदीप सिंह बघेल के अनुसार वर्तमान में वन तुलसी की पत्तियों की बाजार में मांग बढ़ी है। उनके द्वारा ग्रामीणों से वन तुलसी की पत्तियां लगभग 70 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न बड़े बाजारों एवं औषधि कंपनियों से मांग प्राप्त होने पर ग्रामीण अंचलों से वन तुलसी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। वर्तमान में लगभग 100 टन वन तुलसी की पत्तियों की मांग है।
उन्होंने बताया कि शहडोल का क्षेत्र वन संपदा एवं औषधीय महत्व की वनस्पतियों से समृद्ध है। ग्रामीणों एवं किसानों को वन तुलसी के महत्व और बाजार में इसकी मांग के संबंध में जानकारी दी जा रही है, ताकि उपलब्धता के अनुसार वे इसका लाभ प्राप्त कर सकें।
आयुर्वेद में वन तुलसी का औषधीय उपयोग
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अंकित नामदेव के अनुसार वन तुलसी अर्थात तुलसी/सुरसा का आयुर्वेद में विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि वन तुलसी सामान्य तुलसी की तुलना में आकार में बड़ी होती है तथा इसकी सुगंध भी अधिक होती है। इसके पत्तों का उपयोग पारंपरिक रूप से श्वसन संबंधी समस्याओं सहित विभिन्न औषधीय प्रयोजनों में किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि वन तुलसी का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है। इसकी जड़, पत्तियों एवं मंजरी के विभिन्न पारंपरिक उपयोग बताए जाते हैं। इसकी तीव्र सुगंध के कारण इसे कीटों को दूर रखने के लिए भी उपयोग किए जाने की जानकारी दी गई।
वन तुलसी सहित औषधीय महत्व वाली वनस्पतियों के संग्रहण में स्थानीय नियमों एवं वन विभाग के प्रावधानों का पालन आवश्यक है। इन वनस्पतियों के संरक्षण के साथ-साथ इनके व्यवस्थित एवं टिकाऊ उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अतिरिक्त अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
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4 views | Shahdol, Madhya Pradesh | Sep 22, 2026