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शहडोल समाचार

@shahdol_samachar
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Shahdol Police ने किया हत्यारों का पर्दाफाश,

कमेंट में देखे पूरी ख़बर
तो क्या 21 लाख छुपाया जा रहा है और मौत के असली गुनहगारों को बचाया जा था है
विवेकानंद तिवारी का निलंबन अब नेशनल स्टोरी बनते जा रहा है।
26 मिलियन फॉलोअर वाले लाफिंग कलर्स ने भी पोस्ट किया।
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ट्रैफ़िक पुलिस विवेकानंद तिवारी ने सबूत दिखाए कि उनकी तबीयत खराब थी और विभाग को तत्काल सूचित किया था, बावजूद इसके उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।।
ट्रैफिक पुलिस विवेकानंद के निलंबन पर तथ्यात्मक जानकारी 

विभिन्न प्लेटफार्म पर निलंबित प्रआर विवेकानंद के समर्थकों की प्रतिक्रिया पढ़कर ऐसा प्रतीत हुआ कि इस संबंध में विभागीय कार्रवाई का कारण और पृष्ठभूमि के विषय में नागरिकों को भी यदि जानकारी हो तो संभव है कि वे सभी मिलकर निलंबित प्रआर विवेकानंद को उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रेरित कर सकें।

जैसा कि आप जानते हैं कि श्री विवेकानंद पुलिस विभाग में प्रआर के रूप शहडोल जिले में यातायात थाना पर पदस्थ किए गए थे। जैसा कि प्रत्येक शासकीय कर्मचारी से अपेक्षा होती है कि वे निर्धारित ड्यूटी पर समय से आयें और शासन द्वारा निर्धारित आठ घंटे की सेवायें शासन के लिए दें।

काफी लंबे समय से यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त हो रही थी कि श्री विवेकानंद ने विभिन्न सोशल प्लेटफार्म पर अपनी फैन फॉलोइंग को देखते हुए उसे अपनी और अपने परिवार की आय का माध्यम बना लिया है, और इस कार्य के लिए उन्होंने निजी तौर पर वीडियोग्राफर और फिल्मांकन के लिए प्राइवेट व्यक्ति को रखकर समानांतर रुप से आय का श्रोत बना लिया है, जिसकी पुष्टि की जा रही है।

श्री विवेकानंद द्वारा अपनी शासकीय ड्यूटी को छोड़कर निजीतौर पर वीडियो शूटिंग का किया जाना, शासकीय कार्य नहीं माना जा सकता।
यदि श्री विवेकानंद सोशल मीडिया संबंधित दायित्व निभाना चाहते हैं तो उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मौजूद मीडिया सेल में पोस्टिंग लेकर शासन के लिए यही जनजागृति के वीडियो बनाकर अपना दायित्व निर्वहन करना चाहिए और यदि बड़े स्तर पर वह मप्र पुलिस की ओर जन जागरुक अभियान में सक्रियता प्रदर्शित करने के इच्छुक हैं तो पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया सेल में उन्हें अपनी पदस्थापना के लिए सहमति देनी चाहिए।

शहडोल पुलिस के लिए यह गौरव की बात होगी कि पुलिस के एक प्रआर जनता के बीच पॉपुलर हैं, परन्तु किसी भी शासकीय कर्मचारी को, यदि वह जनता में पॉपुलर है तो उसे इस बात का कोई अधिकार नहीं कि वह अपने शासकीय दायित्वों से बिना सूचना अनुपस्थित होकर मनमर्जी से ड्यूटी के समय कोई शासकीय कार्य न कर ड्यूटी से गायब रहे।
इतना ही नहीं इसके अतिरिक्त इस अनुपस्थित में सिर्फ अपनी इच्छा से, अपने निजी लाभ के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहकर निजी व्यक्ति से वीडियो निर्माण कराकर व्यावसायिक कार्य में अपनी संलिप्तता रखना, अनुचित और पदीय दायित्वों की घोर उपेक्षा है।

इसलिए आप सभी प्रशंसकों से अपील है कि वे श्री विवेकानंद जी को सूचित करें कि वे अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन नियमानुसार करें, उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुसार मीडिया सेल शहडोल अथवा सोशल मीडिया सेल भोपाल में सेवा देने के लिए आगे आयें । ताकि उनकी प्रतिभा का लाभ मप्र शासन को, उनकी योजनाओं की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाने में मिल सके ।
अन्यथा 
"बिना शासकीय कार्य के वेतन प्राप्त करना न तो वैधानिक रूप से संभव है और न ही यह नैतिक रुप से उचित।"
Shahdol Police
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इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर यातायात जागरूकता के लिए चर्चित आरक्षक विवेकानंद तिवारी को सामान्य सेवा शर्तों के उल्लंघन एवं निजी लाभ अर्जित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

उनके फॉलोअर्स और प्रशंसकों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उनके प्रयासों को समाज ने सराहा। भले ही हर व्यक्ति उनके संदेशों का पालन करता हो या नहीं, लेकिन यह निश्चित है कि उन्होंने लाखों लोगों के ज्ञान और जागरूकता में वृद्धि की। इसी कारण उन्हें समय-समय पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया।

यदि उनके कार्य वास्तव में नियमों के विरुद्ध थे, तो यह प्रश्न भी उठता है कि प्रशासन इतने वर्षों तक मौन क्यों रहा? जब उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी, सम्मान मिल रहे थे और उनके वीडियो खुले मंचों पर उपलब्ध थे, तब किसी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई?

विवेकानंद तिवारी कम से कम उन आरक्षकों से तो बेहतर ही दिखाई देते हैं जो चौराहों पर तैनात होने के बावजूद दुकानों में बैठकर समय बिताते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा का ही परिणाम था कि लोग उन्हें देखते ही स्वयं यातायात नियमों का पालन करने और चौराहों पर व्यवस्थित होने का प्रयास करते थे।

नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए जिसने अपनी ड्यूटी को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनजागरूकता का माध्यम बनाया।

इस कार्यवाही का हम पूर्ण रूप से विरोध करते है 

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कम्पनी- एलआईसी इंडिया लिमिटेड शह...