
*दूध पर एमएसपी के दावों की खुली पोल, दुग्ध उत्पादक सड़कों पर दूध फेंकने को मजबूर : पंकज जमवाल*
जोगिंद्रनगर/उमेश कुमार।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पंकज जमवाल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर किसानों और दुग्ध उत्पादकों के साथ छलावा करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री प्रदेश से बाहर जाकर मंचों से दूध पर एमएसपी देने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन हिमाचल की धरती पर वास्तविकता बिल्कुल विपरीत है। प्रदेश के विभिन्न दुग्ध संग्रहण केंद्रों पर आए दिन अव्यवस्था, देरी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसान अपना दूध फेंकने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भड़याल दुग्ध सहकारी समिति में किसानों द्वारा दूध फेंकने की घटना केवल एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस सरकार की किसान विरोधी नीतियों और दुग्ध क्षेत्र में फैली बदइंतजामी का जीवंत उदाहरण है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो किसान सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करके दूध उत्पादन करते हैं, उन्हें अपनी मेहनत की कमाई को सड़कों पर बहाना पड़ रहा है।
पंकज जमवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद लगातार किसानों और पशुपालकों के नाम पर राजनीति करती रही है। चुनावों के दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन आज जमीनी स्तर पर किसानों को न तो पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। दुग्ध संग्रहण केंद्रों पर समय पर दूध न उठाया जाना, भुगतान में देरी, अव्यवस्थित प्रबंधन और किसानों की शिकायतों की अनदेखी आम बात बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता पूरे देश में हिमाचल मॉडल का ढिंढोरा पीट रहे हैं, लेकिन यदि वास्तव में दुग्ध उत्पादकों की स्थिति इतनी बेहतर है तो फिर किसानों को विरोध प्रदर्शन करने और दूध फेंकने जैसी पीड़ादायक परिस्थितियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? सरकार को इस प्रश्न का जवाब प्रदेश की जनता और किसानों को देना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश का किसान आज प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत, महंगे चारे, पशु आहार और अन्य आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व किसानों को राहत और सुरक्षा प्रदान करना था, लेकिन कांग्रेस सरकार केवल विज्ञापन और आत्मप्रशंसा में व्यस्त है। किसानों की वास्तविक समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता किसानों का कल्याण नहीं बल्कि केवल राजनीतिक प्रचार है। यही कारण है कि प्रदेश के विभिन्न वर्गों की तरह अब दुग्ध उत्पादक भी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सरकार की नीतियों का सबसे अधिक खामियाजा छोटे और सीमांत किसान भुगत रहे हैं, जिनकी आजीविका का प्रमुख साधन पशुपालन और दुग्ध उत्पादन है।
पंकज जमवाल ने मांग की कि सरकार तत्काल इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए, दुग्ध संग्रहण व्यवस्था में सुधार करे, किसानों के बकाया भुगतान समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करे तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक करे।
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी। कांग्रेस सरकार को यह समझना होगा कि किसान केवल भाषणों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और प्रभावी प्रशासन से संतुष्ट होते हैं।
प्रदेश की कांग्रेस सरकार किसानों और दुग्ध उत्पादकों का उत्पीड़न बंद करे, अपनी विफलताओं को स्वीकार करे और तत्काल प्रभाव से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे कि भविष्य में किसी भी किसान को अपनी मेहनत का दूध सड़कों पर फेंकने के लिए मजबूर न होना पड़े।