बनाई हार सड़क की बदहाल स्थिति से ग्रामीण परेशान, लोक निर्माण मंत्री से लगाई गुहार
जोगिन्दर नगर/उमेश कुमार।
उपमंडल जोगिन्दर नगर के अंतर्गत ग्राम बनाई हार को जोड़ने वाली सड़क की जर्जर हालत ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। वर्षों से सड़क पर टायरिंग न होने के कारण मार्ग पूरी तरह से खस्ता हो चुका है, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की पुरानी टायरिंग पूरी तरह उखड़ चुकी है और बजरी जगह-जगह ढेरों के रूप में जमा हो गई है। ऐसे में दोपहिया वाहनों के फिसलने और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क के दोनों ओर बनी नालियां भी मिट्टी और कूड़े से भर चुकी हैं। नालियों में उगी घास और झाड़ियों के कारण सड़क और नाली में अंतर करना मुश्किल हो गया है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि वाहन चालकों को बेहद सावधानी के साथ गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मुख्य गांव बनाई हार से लगभग आधा किलोमीटर ऊपर तथा करीब 500 मीटर नीचे सड़क की दो-दो बार टायरिंग करवाई जा चुकी है, लेकिन बीच में स्थित मुख्य गांव बनाई हार का सबसे अधिक क्षतिग्रस्त हिस्सा हर बार नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे ग्रामीणों में विभाग और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग जोगिन्दर नगर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न नेताओं के समक्ष मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
ग्राम पंचायत के प्रधान अजिया पाल, युवक मंडल बनाई हार तथा समस्त ग्रामवासियों ने प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया है कि संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर बनाई हार सड़क की शीघ्र टायरिंग, नालियों की सफाई और आवश्यक मरम्मत कार्य करवाए जाएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो उन्हें अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।