Public App Logo
जब भी कोई इंसान रोता है, तो सिर्फ़ आँखों से आँसू नहीं निकलते... कुछ ही सेकंड बाद नाक भी बहने लगती है। ऐसा क्यों होता है? क्या रोने का नाक से भी कोई कनेक्शन है? जवाब है—हाँ, और यह पूरी तरह विज्ञान है। हमारी आँखों के ऊपर एक छोटी-सी ग्रंथि होती है, जिसे लैक्रिमल ग्लैंड कहा जाता है। यही ग्रंथि हर समय आँसू बनाती रहती है। ये आँसू सिर्फ़ भावनाएँ दिखाने के लिए नहीं होते, बल्कि आँखों को नम रखते हैं, धूल हटाते हैं और बैक्टीरिया से भी बचाते हैं। आमतौर पर आँसू बहुत कम मात्रा में बनते हैं। इसलिए वे आँख के अंदरूनी कोने में मौजूद छोटे-से छिद्र से होकर एक पतली नली के ज़रिए सीधे नाक के अंदर पहुँच जाते हैं। यह प्रक्रिया हर समय चलती रहती है, लेकिन हमें इसका एहसास नहीं होता। अब जब आप ज़ोर से रोते हैं, तो लैक्रिमल ग्लैंड अचानक बहुत ज़्यादा आँसू बनाने लगती है। आँखें इतने सारे आँसू संभाल नहीं पातीं। कुछ आँसू गालों पर बह जाते हैं, जबकि बड़ी मात्रा उसी नली से नाक में पहुँच जाती है। नाक एक साथ इतने तरल को तुरंत अवशोषित नहीं कर पाती। यही वजह है कि रोते समय नाक बहने लगती है और बार-बार उसे साफ़ करना पड़ता है। कई बार यही आँसू गले तक भी पहुँच जाते हैं। #Science #HumanBody #AmazingFacts #Biology #Knowledge - Bihar News