
किशनगंज,जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित छह बच्चों को नई जिंदगी की उम्मीद, बाल हृदय योजना के तहत किशनगंज से पटना रवाना
किशनगंज जिला अन्तर्गत आज दिनांक 02-08-2026 को जन्मजात हृदय रोग (कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज) बच्चों में होने वाली सबसे गंभीर जन्मजात बीमारियों में से एक है। समय पर इसकी पहचान और उपचार नहीं होने पर यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के साथ उनके जीवन के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए बिहार सरकार ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे के उपचार में बाधा न बने। बाल हृदय योजना इसी जनकल्याणकारी सोच का परिणाम है, जिसके माध्यम से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान से लेकर विशेषज्ञ अस्पतालों में निःशुल्क जांच, ऑपरेशन, दवा, भर्ती, परिवहन और उपचारोपरांत फॉलो-अप तक की संपूर्ण व्यवस्था की गई है। यह योजना केवल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। इसी क्रम में रविवार को किशनगंज जिले के छह जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को सदर अस्पताल से तीन एम्बुलेंस के माध्यम से पटना स्थित जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आयोजित विशेष जांच शिविर के लिए रवाना किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनकी विस्तृत जांच कर आगे के उपचार की रूपरेखा तय की जाएगी।
विशेषज्ञों की निगरानी में पहुंचे छह मरीज
डीपीएम डॉ मुनाजिम ने बताया कि पटना भेजे गए मरीजों में बहादुरगंज प्रखंड की दो वर्ष छह माह की बिद्या कुमारी, सात माह की आराध्या कुमारी, ठाकुरगंज के 17 वर्षीय राजेंद्र कुमार राजभर, टेढ़ागाछ के चार माह के श्रेयांश कुमार मांझी, पोठिया के दो वर्षीय सोहन हरिजन तथा किशनगंज प्रखंड के आठ वर्षीय अनाश राजा शामिल हैं। सभी मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में तीन एम्बुलेंस के माध्यम से सुरक्षित रवाना किया गया। शिविर में बाल हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा इकोकार्डियोग्राफी सहित आवश्यक जांच की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क ऑपरेशन एवं अन्य उन्नत उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हर हजार नवजात में आठ से दस बच्चे होते हैं प्रभावित
सिविल सर्जन ने कहा कि प्रत्येक एक हजार नवजात शिशुओं में लगभग आठ से दस बच्चे जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग दो से ढाई लाख बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। समय पर पहचान और उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चे सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए हृदय का विशेषज्ञ उपचार अत्यंत महंगा होता है। ऐसे में बाल हृदय योजना समाज के कमजोर वर्गों के लिए जीवनरक्षक पहल के रूप में उभर रही है।
आरबीएसके की सक्रिय स्क्रीनिंग से बढ़ी पहचान
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव, आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में नियमित रूप से बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं। जांच के दौरान जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण मिलते हैं, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराकर बाल हृदय योजना के तहत रेफर किया जाता है। योजना के अंतर्गत जांच, ऑपरेशन, अस्पताल में भर्ती, दवाइयां, भोजन तथा आने-जाने की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
आंकड़े बताते हैं योजना की बढ़ती पहुंच
सिविल सर्जन ने बताया कि जिले में बाल हृदय योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से अगस्त 2026 तक कुल 47 जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क उपचार के लिए राज्य के विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में भेजा गया है। इनमें 2021 में 3, वर्ष 2022 में 4, वर्ष 2023 में 7, वर्ष 2024 में 11, वर्ष 2025 में 16 तथा वर्ष 2026 में अब तक 6 बच्चों को योजना का लाभ मिला है। वर्ष 2025 में सर्वाधिक 16 बच्चों का सफल रेफरल इस बात का संकेत है कि जिले में आरबीएसके की स्क्रीनिंग व्यवस्था और रेफरल प्रणाली पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रारंभिक अवस्था में बीमारी की पहचान होने से जटिलताओं और बाल मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जिला पदाधिकारी बोले— कोई भी बच्चा उपचार से वंचित नहीं रहेगा
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि जिले का कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से प्रत्येक गांव और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक स्क्रीनिंग को प्रभावी बनाया जाए, ताकि जन्मजात विकृतियों की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही हो सके। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार मिलने से अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं और यही सरकार की जनस्वास्थ्य नीति का मूल उद्देश्य है।
समय पर जांच ही बचा सकती है बच्चों का जीवन
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित चिकित्सकीय दल लगातार बच्चों की जांच कर रहे हैं। जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होती है, उन्हें बाल हृदय योजना के माध्यम से राज्य के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेषज्ञ उपचार का रास्ता आसान बनाया है। जिले से अब तक 47 बच्चों को इस योजना का लाभ दिलाया जा चुका है और भविष्य में भी पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वस्थ बचपन की दिशा में प्रभावी पहल
बाल हृदय योजना आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है जिनके लिए लाखों रुपये का हृदय उपचार संभव नहीं था। समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र रेफरल और विशेषज्ञ उपचार के माध्यम से यह योजना बच्चों को नया जीवन देने के साथ-साथ बाल मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। किशनगंज से पटना रवाना किए गए छह बच्चों की यह यात्रा भी इसी विश्वास का प्रतीक है कि समय पर उपचार मिलने से उनका बचपन सुरक्षित होगा और वे एक स्वस्थ, सामान्य एवं बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।
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