इंसानियत का असली मजहब सिर्फ मोहब्बत है!
तस्वीरें कभी-कभी शब्दों से ज्यादा गहरी कहानी कह जाती हैं। इस तस्वीर में नजर आ रहे बुजुर्ग एक हिंदू मंदिर के प्रांगण के बाहर बैठे हैं। आस्था और इंसानियत की इस खूबसूरत तसवीर में कोई दीवार नहीं है—न दिल में, न सोच में और न ही इस जमीन पर।
भूख, प्यास और मदद का कोई मजहब नहीं होता। हमारे देश की यही तो असली खूबसूरती है, जहाँ मंदिर की घंटियों के साये में इंसान पहले सिर्फ 'इंसान' नजर आता है।
यह तस्वीर उन लोगों के मुँह पर एक करारा तमाचा है, जो हमेशा धर्म के नाम पर समाज में नफरत फैलाने और लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश करते हैं।
आइए, जाति और मजहब की दीवारों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के मददगार बनें और अपनी इस गंगा-जमुनी तहजीब को यूं ही आबाद रखें।
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