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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन
  
दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद

रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। 

दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। 

जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। 

हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से  मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।

#Rafiganj #Aurangabad #AhiyanKhanDada #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimEkta #Chadarposhi #Malida #BiharNews

आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए। #Rafiganj #Aurangabad #AhiyanKhanDada #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimEkta #Chadarposhi #Malida #BiharNews आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

Madanpur, Aurangabad | Jun 27, 2026

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन
  
दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद

रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। 

दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। 

जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। 

हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से  मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।

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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए। #Rafiganj #Aurangabad #AhiyanKhanDada #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimEkta #Chadarposhi #Malida #BiharNews आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

Aurangabad, Aurangabad | Jun 27, 2026

फतेहपुर में सूफी संत चाँद फकीर के ताजिए पर उमड़ी आस्था, ग़म-ए-हुसैन में डूबा जनसैलाब

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना चाँद फकीर का ऐतिहासिक ताजिया

11वीं मोहर्रम तक जारी रहती है ताजियादारी, दूर-दूर से पहुंचते हैं अकीदतमंद

✒️रिपोर्ट अजय श्रीवास्तव

फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)। मोहर्रम के अवसर पर फतेहपुर का ऐतिहासिक सूफी संत चाँद फकीर का ताजिया धार्मिक आस्था, गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांप्रदायिक सौहार्द का अद्भुत प्रतीक बनकर सामने आता है। यहां हर वर्ष हजारों की संख्या में विभिन्न समुदायों के लोग पहुंचकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और अपनी आस्था के अनुसार नजराना पेश करते हैं। चाँद फकीर का ताजिया अपनी अनूठी परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के कारण जिले ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी विशेष पहचान रखता है।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही इमाम हुसैन की याद में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इन्हीं आयोजनों में सूफी संत चाँद फकीर का ताजिया सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र माना जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सूफी संत चाँद फकीर अपने जीवनकाल में मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही पूरी तरह ग़म-ए-हुसैन में डूब जाते थे। बताया जाता है कि वे अपने हाथों से तैयार किया गया ताजिया टोकरी में रखकर शहर की गलियों में लेकर निकलते थे और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसे सुपुर्द-ए-खाक करते थे।

समय के साथ उनके इंतकाल के बाद इस परंपरा को स्थानीय समुदाय ने आगे बढ़ाया। आज भी उसी परंपरा का निर्वहन पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ किया जाता है। वर्तमान स्वरूप में तैयार किया जाने वाला ताजिया अपनी बारीक नक्काशी, आकर्षक सजावट और बहुमूल्य कलात्मक कार्य के कारण लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इस ऐतिहासिक ताजिए की जियारत के लिए फतेहपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं।

मोहर्रम के दौरान सबील, लंगर और फातिहा का आयोजन किया जाता है। शिया समुदाय द्वारा किए जाने वाले आग का मातम तथा जंजीर और छुरी का मातम भी यहां की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

फतेहपुर की सबसे विशेष परंपरा यह है कि जहां अधिकांश स्थानों पर दसवीं मोहर्रम के साथ ताजियादारी का समापन हो जाता है, वहीं फतेहपुर में यह सिलसिला ग्यारहवीं मोहर्रम तक जारी रहता है। यही विशेषता इस आयोजन को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान दिलाती है।

वायरल फैक्ट

चाँद फकीर के ताजिए की भव्यता, धार्मिक परंपराएं और सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीरें एवं वीडियो हर वर्ष सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं। यह आयोजन फतेहपुर की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण माना जाता है।

सूफी संत चाँद फकीर का ताजिया केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और इंसानियत की साझा विरासत का प्रतीक है। इमाम हुसैन की शहादत हमें अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने, सत्य का साथ देने और मानवता की सेवा का संदेश देती है। फतेहपुर की यह ऐतिहासिक परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सांप्रदायिक सद्भाव की प्रेरणा बनी रहेगी।

🟥 ND NEWS की विशेष अपील

ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा सभी नागरिकों से अपील करता है कि धार्मिक आयोजनों को प्रेम, शांति और आपसी सम्मान के साथ संपन्न करें। सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान करें तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

जनहित में सुझाव

✅ धार्मिक आयोजनों में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
✅ अफवाहों और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट से बचें।
✅ भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करें।
✅ लंगर, सबील और जनसेवा जैसे कार्यों में सहभागिता बढ़ाएं।
✅ युवा पीढ़ी को कर्बला के त्याग, बलिदान और इंसानियत के संदेश से परिचित कराएं।

"कर्बला की कुर्बानी हमें इंसानियत, न्याय, सब्र और भाईचारे की राह पर चलने की प्रेरणा देती है।"
👇🏿👇🏿👇🏿
#NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Fatehpur #ChandFaqeer #Muharram2026 #YaHussain #Tazia #GangaJamuniTehzeeb #CommunalHarmony #UPNews #Moharram #SufiTradition
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🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा

मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया

✒️ रिपोर्ट: सहयोगी शिवा गुप्ता के साथ जिला ब्यूरो अजय श्रीवास्तव

📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR)

📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP)

📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP)

📅 दिनांक: 26 जून 2026
📆 दिन: शुक्रवार

📧 Email: ndnewschannel@gmail.com

📞 मोबाइल: 9696119696

फतेहपुर में सूफी संत चाँद फकीर के ताजिए पर उमड़ी आस्था, ग़म-ए-हुसैन में डूबा जनसैलाब हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना चाँद फकीर का ऐतिहासिक ताजिया 11वीं मोहर्रम तक जारी रहती है ताजियादारी, दूर-दूर से पहुंचते हैं अकीदतमंद ✒️रिपोर्ट अजय श्रीवास्तव फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)। मोहर्रम के अवसर पर फतेहपुर का ऐतिहासिक सूफी संत चाँद फकीर का ताजिया धार्मिक आस्था, गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांप्रदायिक सौहार्द का अद्भुत प्रतीक बनकर सामने आता है। यहां हर वर्ष हजारों की संख्या में विभिन्न समुदायों के लोग पहुंचकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और अपनी आस्था के अनुसार नजराना पेश करते हैं। चाँद फकीर का ताजिया अपनी अनूठी परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के कारण जिले ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी विशेष पहचान रखता है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही इमाम हुसैन की याद में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इन्हीं आयोजनों में सूफी संत चाँद फकीर का ताजिया सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सूफी संत चाँद फकीर अपने जीवनकाल में मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही पूरी तरह ग़म-ए-हुसैन में डूब जाते थे। बताया जाता है कि वे अपने हाथों से तैयार किया गया ताजिया टोकरी में रखकर शहर की गलियों में लेकर निकलते थे और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसे सुपुर्द-ए-खाक करते थे। समय के साथ उनके इंतकाल के बाद इस परंपरा को स्थानीय समुदाय ने आगे बढ़ाया। आज भी उसी परंपरा का निर्वहन पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ किया जाता है। वर्तमान स्वरूप में तैयार किया जाने वाला ताजिया अपनी बारीक नक्काशी, आकर्षक सजावट और बहुमूल्य कलात्मक कार्य के कारण लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है। इस ऐतिहासिक ताजिए की जियारत के लिए फतेहपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं। मोहर्रम के दौरान सबील, लंगर और फातिहा का आयोजन किया जाता है। शिया समुदाय द्वारा किए जाने वाले आग का मातम तथा जंजीर और छुरी का मातम भी यहां की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। फतेहपुर की सबसे विशेष परंपरा यह है कि जहां अधिकांश स्थानों पर दसवीं मोहर्रम के साथ ताजियादारी का समापन हो जाता है, वहीं फतेहपुर में यह सिलसिला ग्यारहवीं मोहर्रम तक जारी रहता है। यही विशेषता इस आयोजन को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान दिलाती है। वायरल फैक्ट चाँद फकीर के ताजिए की भव्यता, धार्मिक परंपराएं और सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीरें एवं वीडियो हर वर्ष सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं। यह आयोजन फतेहपुर की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण माना जाता है। सूफी संत चाँद फकीर का ताजिया केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और इंसानियत की साझा विरासत का प्रतीक है। इमाम हुसैन की शहादत हमें अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने, सत्य का साथ देने और मानवता की सेवा का संदेश देती है। फतेहपुर की यह ऐतिहासिक परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सांप्रदायिक सद्भाव की प्रेरणा बनी रहेगी। 🟥 ND NEWS की विशेष अपील ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा सभी नागरिकों से अपील करता है कि धार्मिक आयोजनों को प्रेम, शांति और आपसी सम्मान के साथ संपन्न करें। सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान करें तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। जनहित में सुझाव ✅ धार्मिक आयोजनों में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। ✅ अफवाहों और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट से बचें। ✅ भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करें। ✅ लंगर, सबील और जनसेवा जैसे कार्यों में सहभागिता बढ़ाएं। ✅ युवा पीढ़ी को कर्बला के त्याग, बलिदान और इंसानियत के संदेश से परिचित कराएं। "कर्बला की कुर्बानी हमें इंसानियत, न्याय, सब्र और भाईचारे की राह पर चलने की प्रेरणा देती है।" 👇🏿👇🏿👇🏿 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Fatehpur #ChandFaqeer #Muharram2026 #YaHussain #Tazia #GangaJamuniTehzeeb #CommunalHarmony #UPNews #Moharram #SufiTradition 👇👇 @dgpup @RSSorg @UPGovt @wpl1090 @RSSgeet @Uppolice @MIB_India @PMOIndia @HMOIndia @abmanglik @VHPDigital @igrangealld @myogioffice @InfoDeptUP @dmfatehpur @sdmsadarftp @CMOfficeUP @CMOUP_RC @UPPRD1948 @ChiefSecyUP @ChiefSecyUP @MahantYogiG @FatehpurSdm @fatehpurpolice @BajrangDalOrg @112UttarPradesh @myogiadityanath @CommissionerPrg @ADGZonPrayagraj 👇🏿👇🏿👇🏿 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया ✒️ रिपोर्ट: सहयोगी शिवा गुप्ता के साथ जिला ब्यूरो अजय श्रीवास्तव 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP) 📅 दिनांक: 26 जून 2026 📆 दिन: शुक्रवार 📧 Email: ndnewschannel@gmail.com 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 26, 2026

🕌 फतेहपुर का मशहूर चाँद फकीर का ताजिया, आस्था और गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनोखी मिसाल

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फतेहपुर में मुहर्रम के अवसर पर सूफी संत चाँद फकीर का ऐतिहासिक ताजिया एक बार फिर आस्था, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बना। हज़रत इमाम हुसैन की याद में निकाले जाने वाले इस ताजिये को देखने के लिए फतेहपुर ही नहीं, आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने मिलकर परंपरा निभाई। सबील, लंगर और धार्मिक रस्मों के बीच फतेहपुर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत ने एक बार फिर कौमी एकता का संदेश दिया।
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#Fatehpur #Muharram #ChandFaqir #Taziya #ImamHussain #Karbala #SufiSaint #CommunalHarmony #GangaJamuniTehzeeb #Brotherhood #Unity #FatehpurNews #UPNews #ReligiousTradition #Culture #Heritage #NDNews #NDNewsChannel #GroundReport #LatestNews

🕌 फतेहपुर का मशहूर चाँद फकीर का ताजिया, आस्था और गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनोखी मिसाल 👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿 फतेहपुर में मुहर्रम के अवसर पर सूफी संत चाँद फकीर का ऐतिहासिक ताजिया एक बार फिर आस्था, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बना। हज़रत इमाम हुसैन की याद में निकाले जाने वाले इस ताजिये को देखने के लिए फतेहपुर ही नहीं, आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने मिलकर परंपरा निभाई। सबील, लंगर और धार्मिक रस्मों के बीच फतेहपुर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत ने एक बार फिर कौमी एकता का संदेश दिया। 👇🏿👇🏿👇🏿 #Fatehpur #Muharram #ChandFaqir #Taziya #ImamHussain #Karbala #SufiSaint #CommunalHarmony #GangaJamuniTehzeeb #Brotherhood #Unity #FatehpurNews #UPNews #ReligiousTradition #Culture #Heritage #NDNews #NDNewsChannel #GroundReport #LatestNews

Fatehpur, Fatehpur | Jun 26, 2026

बहराइच में 7वीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस, कौमी एकता की बनी मिसाल
#Muharram2026 #Crimeoutindia #YaHussain #Karbala #Bahraich #Ranipur #MuharramJuloos #ImamHussain #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimUnity

बहराइच में 7वीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस, कौमी एकता की बनी मिसाल #Muharram2026 #Crimeoutindia #YaHussain #Karbala #Bahraich #Ranipur #MuharramJuloos #ImamHussain #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimUnity

Bahraich, Bahraich | Jun 24, 2026

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