
आष्टा के पाडलिया गांव के कृषक देवकरण ठाकुर ने अमरूद की खेती से बदली अपनी किस्मत, पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी में कमाई बंपर शुद्ध आय
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पाडलिया के प्रगतिशील कृषक श्री देवकरण ठाकुर ने सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर खेती में एक नई मिसाल पेश की है। उद्यानिकी विभाग की एमआईडीएच योजना के अंतर्गत फल क्षेत्र विस्तार (अमरूद) घटक के तहत उन्हें वर्ष 2023-24 में लाभान्वित किया गया था। उन्हें शासन की ओर से 1.50 हेक्टेयर रकबें में अमरूद की खेती करने के लिए 60,000 रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई, जिसने उन किसानी की दिशा ही बदल दी।
पारंपरिक फसलों के मुकाबले बागवानी को अपनाने के बाद श्री देवकरण ठाकुर की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है। योजना से लाभान्वित होने से पहले वे अपने खेतों में पारंपरिक रूप से गेहूं की फसल उगाते थे, जिससे उन्हें 80 क्विंटल उपज मिलती थी और 70,000 रुपये की लागत के बाद 1,30,000 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती थी। वहीं, एमआईडीएच योजना के सहयोग से अमरूद (स्-49 प्रजाति) की बागवानी अपनाने के बाद वर्ष 2026-27 में उन्हें बंपर 220 क्विंटल की कुल उपज प्राप्त हुई है।
इस आधुनिक और लाभकारी बागवानी में उनकी कुल लागत 1,25,000 रुपये आई, जिसके एवज में उन्हें 5,50,000 रुपये की कुल आय हुई और तमाम खर्च निकालकर उन्हें सीधे तौर पर 4,25,000 रुपये की शानदार शुद्ध आय प्राप्त हुई है। पारंपरिक गेहूं की खेती के मुकाबले अमरूद के बाग ने उनकी शुद्ध आय में लगभग तीन गुना से अधिक की वृद्धि कर दी है। कृषक देवकरण ठाकुर की यह सफलता अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणा स्त्रोत है, जो यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं के सहयोग और नवाचार से किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
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