
#सेवा_संकल्प_अभियान
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कहानी बदलाव की
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आजीविका मिशन से जुड़कर गीता दीदी ने बनाई अपनी अलग पहचान
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स्व-सहायता समूह से जुड़कर व्यवसाय स्थापित किया, परिवार की आय बढ़ाई और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
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मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार एवं आजीविका के विभिन्न अवसरों से लाभान्वित किया जा रहा है। मिशन से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ ही अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी विकासखंड धरमपुरी के ग्राम चंदावड़ निवासी श्रीमती गीता रविंद चौहान की है।
*समूह से जुड़ने से पहले की स्थिति*
श्रीमती गीता रविंद चौहान के परिवार के पास कृषि भूमि नहीं थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए वे मजदूरी एवं घरेलू कार्यों पर निर्भर थीं। उनके पति भी मजदूरी का कार्य करते थे। मजदूरी से प्राप्त सीमित आय से परिवार का दैनिक खर्च संचालित होता था। आय के सीमित साधनों के कारण परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति में कठिनाई होती थी तथा कई आवश्यक कार्यों के लिए ऋण लेना पड़ता था।
ऐसी परिस्थितियों में श्रीमती गीता ने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने तथा स्वयं की आय का स्थायी साधन विकसित करने का संकल्प लिया।
*आजीविका मिशन से जुड़कर मिली नई दिशा*
ग्राम में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर श्रीमती गीता ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ‘साई बाबा आजीविका स्व-सहायता समूह’ का गठन किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत एवं आपसी लेन-देन की गतिविधियों में सहभागिता की। समूह द्वारा प्रति सप्ताह 25 रुपये तथा प्रतिमाह 100 रुपये की बचत के माध्यम से समूह का संचालन किया गया।
समूह को प्राप्त 15 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि से समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिली। इसके साथ ही MPGB शाखा धामनोद के माध्यम से साई बाबा आजीविका स्व-सहायता समूह को 3.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ।
*कटलरी व्यवसाय से बढ़ी आय*
समूह से प्राप्त ऋण में से श्रीमती गीता ने 1 लाख रुपये का ऋण लेकर कटलरी दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। व्यवसाय के विस्तार के साथ उन्होंने सिलाई कार्य को भी व्यवसाय से जोड़ने की योजना बनाई, ताकि आय के अतिरिक्त साधन विकसित किए जा सकें।
व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए श्रीमती गीता को मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना से 50 हजार रुपये तथा ग्राम संगठन के माध्यम से 80 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। उपलब्ध वित्तीय सहयोग एवं निरंतर मेहनत से उन्होंने अपनी कटलरी दुकान के व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
व्यवसाय में धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी और आय में भी वृद्धि होने लगी। उनके पति ने भी व्यवसाय में सहयोग करना प्रारंभ किया। इसके साथ ही वे ड्राइवरी का कार्य भी करने लगे। इस प्रकार परिवार के दोनों सदस्यों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए और परिवार की आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार आया।
*परिवार की आर्थिक स्थिति में आया सकारात्मक बदलाव*
श्रीमती गीता के प्रयासों एवं आजीविका मिशन से प्राप्त सहयोग के परिणामस्वरूप उनके परिवार की मासिक आय लगभग 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति सुगमता से होने लगी है। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ परिवार अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजनाएं बना पा रहा है।
श्रीमती गीता की सफलता यह दर्शाती है कि स्व-सहायता समूह, नियमित बचत, बैंक ऋण एवं शासकीय योजनाओं का समन्वित लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
आज श्रीमती गीता न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, बल्कि उनका अनुभव गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रहा है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक नई पहचान बनाई है। श्रीमती गीता इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करती हैं।
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