महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम, संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी तथा पीड़ित-केंद्रित पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ट्रांसफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRI) द्वारा 9 एवं 10 अक्टूबर को धार जिले में दो दिवसीय पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला सुरक्षा शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक कार्यालय, धार के सभागार में संपन्न हुआ। इसमें जिले के सभी थानों से दो-दो पुलिस प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों का संचालन TRI की विशेषज्ञ टीम ने किया। इसमें अधिवक्ता एवं जेंडर विशेषज्ञ सुश्री सुनीला सिंह, विधि एवं जेंडर विशेषज्ञ श्री बलवंत सिंह तथा जेंडर विशेषज्ञ सुश्री ईशा शांडिल्य, सुश्री पल्लवी जैन और सुश्री स्वाति प्रमार शामिल रहीं। TRI की ओर से श्री विनम्र धाकड़, श्री मयंक सोनी एवं श्री आनंदू ने भी सहभागिता की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विजय डावर एवं सुश्री पारुल बेलपुरकर ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों को संबोधित किया तथा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण में पुलिस विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग तथा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), धार के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सामुदायिक स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, हिंसा से संबंधित समस्याओं और उपलब्ध सहायता सेवाओं के अनुभवों को प्रशिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से लोक अधिकार केंद्र, मनावर की समता सखी श्रीमती समोनती दीदी तथा TRI की सामुदायिक संसाधन व्यक्ति श्रीमती गीता देवड़ा भी शामिल हुईं। उनकी सहभागिता से महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों तथा सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
*कानूनी प्रावधानों और संवेदनशील पुलिसिंग पर विशेष जोर*
प्रशिक्षण के दौरान लैंगिक असमानता, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा के विभिन्न स्वरूपों तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (PWDVA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों की कानूनी समझ को मजबूत करना तथा हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों के मामलों में कानून के अनुरूप उचित, संवेदनशील और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की क्षमता विकसित करना था।
प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि हिंसा से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका केवल शिकायत दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की बात गंभीरता से सुनना, उसकी परिस्थितियों को समझना तथा उसकी सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का सम्मान करना भी आवश्यक है। पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग के अंतर्गत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सहज एवं भरोसेमंद बनाने और प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक सहायता सेवाओं से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
बच्चों के विरुद्ध लैंगिक अपराधों के मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने, उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देने तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को इस प्रकार सक्षम बनाना था कि वे हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी सहायता उपलब्ध करा सकें।
*पुलिस एवं सहायता संस्थाओं के बीच समन्वय मजबूत करने पर चर्चा*
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), ब्लॉक स्तरीय लोक अधिकार केंद्रों (LAK/GRC) तथा वन स्टॉप सेंटर (OSC) के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विशेष चर्चा की गई। विभिन्न संस्थाओं की भूमिकाओं, आपसी सहयोग और हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों को सुरक्षा सेवाओं, कानूनी सहायता तथा अन्य आवश्यक सेवाओं से समय पर जोड़ने की प्रक्रिया पर विचार साझा किए गए।
लोक अधिकार केंद्रों और सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों तथा उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। सामुदायिक स्तर पर महिलाओं से संबंधित समस्याओं की पहचान होने पर संबंधित विभागों और संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरतमंदों को उचित सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई।
प्रतिभागियों को बताया गया कि पुलिस और सामुदायिक संस्थाओं के बीच बेहतर संवाद से महिलाओं के लिए सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सुलभ हो सकती है। इसके लिए संबंधित संस्थाओं की स्पष्ट भूमिका, प्रभावी संवाद और समयबद्ध समन्वय आवश्यक है, ताकि हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों को उनकी जरूरतों के अनुरूप सुरक्षा, कानूनी सहायता और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
*सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण की दिशा में पहल*
दो दिवसीय प्रशिक्षण का व्यापक उद्देश्य पुलिस व्यवस्था और सामुदायिक संस्थाओं के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना तथा महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और प्रभावित व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी बनाना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से कानूनी जानकारी, संवेदनशील व्यवहार और संस्थागत समन्वय को एकीकृत करने पर बल दिया गया, ताकि हिंसा से जुड़े मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित व्यक्तियों की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों का भी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
पुलिस, विभिन्न विभागों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, लोक अधिकार केंद्रों और सहायता सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर तालमेल से महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा न्याय तक उनकी पहुंच को अधिक सहज और प्रभावी बनाया जा सकता है। यह पहल ऐसे सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण है, जहां महिलाएं और बच्चे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें तथा आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी भय या संकोच के सहायता प्राप्त कर सकें।
Jansampark Madhya Pradesh
Dhar, Madhya Pradesh | Oct 12, 2026