
#कुँवर सिंह पीजी कॉलेज के संस्थापक प्रबंधक की 47वीं पुण्यतिथि पर संगोष्ठी एवं व्याख्यानमाला आयोजित
#बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ की पुण्यतिथि पर संगोष्ठी, व्यक्तित्व-कृतित्व को किया गया याद
@जे आलम ✍️
बलिया, 16 सितंबर।
कुँवर सिंह पीजी कॉलेज में महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक, लोक-जन चेतना के संवाहक, सहकारिता आंदोलन के प्रणेता एवं शिक्षा के माध्यम से समाज में विकास की नई धारा प्रवाहित करने वाले पूर्वांचल के मालवीय के नाम से प्रसिद्ध बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ की 47वीं पुण्यतिथि के अवसर पर संगोष्ठी एवं व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के अध्यक्ष श्री इंद्रजीत सिंह ने की, जबकि प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार सिंह के कुशल निर्देशन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुँवर सिंह एवं बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ हुआ। इसके पश्चात शिवशंकर सिंह सभागार में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। महाविद्यालय की छात्राओं निक्की एवं नेहा ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गान प्रस्तुत कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ के विचार हर युग में प्रासंगिक रहेंगे। उन्होंने लोक से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका व्यक्तित्व अत्यंत विशिष्ट था और उन्होंने पूरे समाज को अपना परिवार मानकर शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान के लिए कार्य किया।
कार्यक्रम में श्री अश्वनी सिंह, जीपी सिंह सहित अन्य विद्वानों ने बाबू शिवशंकर सिंह के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने उन्हें सहृदय, परोपकारी एवं समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के लिए समर्पित रहा।
वक्ताओं ने कहा कि बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ महामना मदन मोहन मालवीय के विचारों से गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने अपने संसाधनों का उपयोग समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग तक शिक्षा और विकास की धारा पहुंचाने में किया। ग्रामीण पूर्वांचल में शिक्षा के प्रसार के लिए उनके प्रयासों ने ऐसा इतिहास रचा, जिसका लाभ आज भी नई पीढ़ी को मिल रहा है।
मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्रबंधक श्री नन्दलाल सिंह ने कहा कि बाबू शिवशंकर सिंह कहा करते थे कि “सच्ची क्रांति सौंदर्य और सम्पूर्णता की सीमा है।” उन्होंने कहा कि वकील साहब गरीबों के मसीहा और परोपकार एवं दया की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। वे सामान्य व्यक्ति नहीं, बल्कि कर्म को धर्म मानकर जीवन जीने वाले महापुरुष थे। पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री दिनेश बहादुर सिंह, श्री नन्दलाल सिंह, डॉ. गजेंद्र पाल सिंह (पूर्व प्राचार्य), प्रो. बैकुंठ नाथ पाण्डेय (प्राचार्य, सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया), प्रो. निर्मला सिंह (प्राचार्या, मर्यादा पुरुषोत्तम कॉलेज, रतनपुरा) एवं प्रो. दयालानन्द राय (प्राचार्य, टी.डी. कॉलेज) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामावतार उपाध्याय ने किया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. मनजीत सिंह ने किया।
इस अवसर पर श्री अवनीश सिंह (प्राचार्य, दयानन्द इंटर कॉलेज), श्री राजेश कुमार यादव (प्रधानाचार्य, छिछोर), प्रो. अखिलेश राय, डॉ. संदीप पाण्डेय, प्रो. फूलबदन सिंह, प्रो. सत्य प्रकाश सिंह, प्रो. सच्चिदानंद राम, प्रो. अजय बिहारी पाठक, प्रो. संजय, डॉ. दिव्या मिश्रा, डॉ. हरिशंकर सिंह, डॉ. शैलेश पाण्डेय, आनंद सिंह, डॉ. आशीष कठेरिया, डॉ. मदन राम, डॉ. योगेंद्र, अनिल गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. राजेन्द्र पटेल, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. योगेंद्र यादव, डॉ. धीरेन्द्र सिंह, लाल वीरेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. सुनील चतुर्वेदी, रत्नसेन सिंह, डॉ. प्रशांत, डॉ. शशिप्रकाश, डॉ. विपुल सिंह, सुजीत कुमार, पुनिल कुमार, डॉ. अवनीश जगन्नाथ, मनोज सिंह, डॉ. प्रमोद सिंह, डॉ. अंकिता सिंह, डॉ. विजया वर्मा, शबाना खातून, रामकुमार सिंह, राजकुमार, शाश्वत सिंह एवं दीपक सिंह सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।अगर चाहें तो मैं इसी खबर का और ज्यादा अखबारी, प्रभावशाली हेडिंग वाला संस्करण भी तैयार कर सकता हूँ।
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