
फर्जी नर्सिंग कॉलेजों पर छात्रों का फूटा गुस्सा, कलेक्टरेट के बाहर दंडवत प्रदर्शन से प्रशासन को ललकारा
एनओसी और मान्यता के बिना संचालित संस्थानों पर कार्रवाई की मांग, भविष्य अंधकार में बताकर छात्रों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
भीलवाड़ा( महेंद्र नागोरी)जिले में बिना वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और आवश्यक मान्यता के कथित रूप से संचालित निजी नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ सोमवार को नर्सिंग छात्र-छात्राओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र कलेक्टरेट पहुंचे और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए दंडवत लेटकर अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए अवैध रूप से संचालित संस्थानों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि जिले के कई निजी नर्सिंग कॉलेज राजस्थान नर्सिंग काउंसिल और इंडियन नर्सिंग काउंसिल की आवश्यक मान्यता एवं एनओसी के बिना संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्र वर्षों तक पढ़ाई करने के बावजूद न तो पंजीयन करा पा रहे हैं और न ही सरकारी भर्तियों तथा संविदा नौकरियों के लिए पात्र बन रहे हैं।
छात्रों ने कहा कि उन्होंने लाखों रुपये फीस के रूप में जमा कराए, लेकिन अब उनके सामने भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। डिग्री और प्रशिक्षण पर प्रश्नचिह्न लगने से उनका करियर दांव पर लग गया है। उन्होंने मांग की कि जिले के सभी निजी नर्सिंग कॉलेजों की एनओसी और मान्यता की स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि कोई भी विद्यार्थी भविष्य में गुमराह न हो।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि जिन संस्थानों में अनियमितताएं मिली हैं, उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए और वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस समाधान निकाला जाए। साथ ही जिन छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसके तहत अनिश्चितकालीन धरना, भूख हड़ताल और जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।
छात्रों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने भविष्य, शिक्षा की गुणवत्ता और न्याय के अधिकार के लिए है। अब वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक दोषियों पर कार्रवाई और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।